अक्सर रेस्टोरेंट और होटल में मिलने वाला भोजन का स्वाद लाजवाब होता है लेकिन इसमें ट्रांस फैट की ज्यादा मात्रा सेहत के लिए भी नुकसानदायक होता है।
हालांकि, खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने खाद्य वनस्पति तेलों और वसा में ट्रांस-फैट को वजन के हिसाब से दो फीसदी तक सीमित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
यह कदम हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया की मांग पर पीएमओ, स्वास्थ्य मंत्रालय और कानून मंत्रालय ने उठाया है। उधर, ट्रांस फैट की मात्रा को देश के रेस्टोरेंट, होटल, कैफे और किराना वस्तुओं से भी दूर करने की मांग जोर पकड़ने लगी है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के के अग्रवाल ने बताया कि वर्षों से ट्रांस फैट जंक फूड्स में प्रमुख है। वे रासायनिक रूप से हाइड्रोजन को वनस्पति तेल में जोड़कर बनता है।
वहीं, नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. सारिका जिंदल की मानें तो ट्रांस फैट की वजह से इंसान के आंखों को भी नुकसान पहुंच सकता है।
ऐसे तैयार होता है ट्रांस फैट
ट्रांस फैट वनस्पति तेलों में हाइड्रोजन अणुओं को पंप करके बनाया जाता है। यह तेल की रासायनिक संरचना को बदल उसे तरल से ठोस में बदलता है।
इस प्रक्रिया में उच्च दबाव, हाइड्रोजन गैस और धातु उत्प्रेरक शामिल हैं। इसलिए ट्रांस फैट में कैलोरी की अधिकता होती है। यह वजन बढ़ाने और टाइप 2 मधुमेह को बढ़ाता है।
इस तरह से कर सकते हैं बचाव
डॉ. सारिका जिंदल ने बताया कि किसी भी तरह के तेल को खरीदते वक्त उसके पैकेट पर ट्रांस फैट की मात्रा पर गौर करें। चिप्स, बिस्कुट से लेकर नमकीन तक के खाद्य पैकेट पर इसकी मात्रा का विवरण दिया जाता है।
वसा रहित या एक प्रतिशत डेयरी उत्पादों, लीन मीट, मछली, साबुत अनाज वाले खाद्य पदार्थ और फल व सब्जियों जैसे संतृप्त वसा वाले भोजन को चुनें। उनका कहना है कि लोगों को ऐसा भोजन करना चाहिए, जिसमें संतृप्त वसा, ट्रांस वसा और कोलेस्ट्रॉल कम हो।