उच्च न्यायालय उन बच्चों की संपत्ति से निपटने के लिए एक नीति बनाने पर विचार करने का निर्णय लिया है जिन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया है। अदालत ने बच्चों की याचिका पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने हाल ही में वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन को ऐसे ही एक मामले में न्याय मित्र नियुक्त किया है और अनुरोध किया कि वे ऐसी प्रकृति के मामलों में एक नीति निर्धारित करने के लिए इनपुट देकर न्यायालय की सहायता करें।
अदालत दो बच्चों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है जिनके पिता ने पिछले साल सितंबर में पत्नी की हत्या कर खुद आत्महत्या कर ली। बच्चों को बाल कल्याण समिति द्वारा लड़कों के लिए उदयन घर में रखा गया है। बच्चों के परिजनों ने उन्हें अपने साथ ले जाने की इच्छा जताई थी, लेकिन उन्होंने परिजनों के साथ जाने से इन्कार कर दिया।
बाल गृह के माध्यम से दायर याचिका में बच्चों ने कहा कि उनके माता-पिता की संपत्ति को बर्बाद किया जा रहा है। अदालत से संपर्क करने और बच्चों के हितों को सुरक्षित करने के लिए अपने माता-पिता के अधिकार क्षेत्र का आह्वान करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है। अदालत ने सरकार को दो हफ्ते के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 6 दिसंबर तय की है।