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Delhi : सड़क हादसों में जान गंवाने वालों में से 91 फीसदी पुरुष, पैदल यात्रियों की सबसे ज्यादा मौत

Wed, 15 Nov 2023 05:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

इनमें से अधिकतर पुरुष और महिलाएं 40 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के थे। 2022 में सड़क दुर्घटनाओं में 86 प्रतिशत पुरुष और 14 प्रतिशत महिलाएं घायल हुईं।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay
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विस्तार
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सड़क दुर्घटनाओं में हर साल सबसे ज्यादा 91 प्रतिशत पुरुषों की मौत होती है। इनमें से अधिकतर पुरुष और महिलाएं 40 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के थे। 2022 में सड़क दुर्घटनाओं में 86 प्रतिशत पुरुष और 14 प्रतिशत महिलाएं घायल हुईं। घायलों में 19-30 वर्ष की आयु के पुरुष शामिल हैं, जबकि महिलाएं 40 वर्ष से अधिक आयु वर्ग की हैं। वैश्विक सड़क यातायात मौतों में से आधे से अधिक पैदल चलने वालों, साइकिल सवार और मोटरसाइकिल चालकों की होती है। 

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जान गंवाने वालों पीड़ितों में से 43 प्रतिशत पैदल यात्री थे और 38 प्रतिशत दोपहिया वाहन/मोटरसाइकिल चालक थे। मारे गए लगभग 81 प्रतिशत व्यक्ति सवेदनशील सड़क उपयोगकर्ता थे। सभी घायल पीड़ितों में से, 44 प्रतिशत दोपहिया वाहन/मोटरसाइकिल चालक थे और 34 प्रतिशत पैदल यात्री थे। दिल्ली यातायात पुलिस के एक अध्ययन के बाद ये डाटा सामने आया है।

हर साल 3.5 लाख लोगों की जाती है जान
अध्ययन में ये डाटा सामने आने के बाद दिल्ली यातायात पुलिस ने सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। एक अध्ययन के अनुसार 3.5 लाख लोगों की मृत्यु सालाना हो रही हैं। वर्ष 2021 में 22.47 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2022 में कुल सड़क दुर्घटना पीड़ितों में से 21.93% ने अपनी जान गंवाई। इनमें सबसे ज्यादा पैदल यात्रियों की है।
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पैदल यात्रियों की सबसे ज्यादा मौत
पैदल यात्री घातक सड़क दुर्घटनाओं में सबसे प्राथमिक शिकार होते हैं और रोकथाम योग्य सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक पीड़ित होते हैं। 2022 में, कुल 629 पैदल यात्रियों ने अपनी जान गंवाई और 1777 घायल हुए। सड़क दुर्घटनाओं में घायल पैदल यात्रियों का हिस्सा 2021 में 35.94 फीसदी की तुलना में 2022 में घटकर 34.16 फीसदी रहा।

साइकिल सवार दूसरे स्थान पर
पैदल यात्रियों के बाद साइकिल सवारों को सड़क दुर्घटनाओं में सबसे ज्यादा मौतें होती हैं। पिछले आठ वर्षों के दौरान सड़क दुर्घटना पीड़ितों में साइकिल चालकों की हिस्सेदारी लगभग 2 से 4 प्रतिशत रही। सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले साइकिल चालकों का प्रतिशत पिछले 15 वर्षों में धीरे-धीरे कम हो रहा है। वर्ष 2007 में 5.05 प्रतिशत से घटकर 2022 में 2.57 प्रतिशत रह गया है। मृतक साइकिल चालकों का अनुपात (2021 में 3.63 प्रतिशत के मुकाबले 2022 में 3.2 प्रतिशत ) और घायल (2021 में 2.87 प्रतिशत के मुकाबले 2022 में 2.57 प्रतिशत) 2021 की तुलना में कम था।

हर तीन मौतों में से एक मोटरसाइकिल चालक
सड़क दुर्घटनाओं में दोपहिया वाहन चालकों का तीसरा स्थान है। पैदल चलने वालों के बाद, दोपहिया वाहन/मोटरसाइकिल चालक पीड़ितों की अगली सबसे सवेदनशील श्रेणी हैं और दिल्ली में सड़क दुर्घटनाओं में सभी मौतों में से 552 (37.78 प्रतिशत) और 2022 में सभी घायलों में से 2263 (43.49 पीडि़त) पीड़ित हैं । 2022 में, दोपहिया सवारों से जुड़े घातक दुर्घटनाओं में वृद्धि हुई । सड़क दुर्घटनाओं में घायल होने वाले दोपहिया वाहन सवारों की संख्या भी 2021 में 1868 से बढ़कर 2022 में 2263 हो गई। क्रैश डेटा से पता चला है कि दोपहिया वाहन सवार हर तीन मौतों या चोटों में से एक में शिकार थे। एक महत्वपूर्ण तथ्य जो ध्यान दिया जा सकता है वह यह है कि पीड़ितों (मृत्यु और चोटों) के रूप में दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी धीरे-धीरे बढ़ रही है।

हादसों की मुख्य वजह
सड़क इंजीनियरी संबंधी मुद्दे इन दुर्घटनाओं के प्रमुख कारणों में से कई हैं अर्थात अनुचित सड़क वक्रता, चिह्नों और रेखाओं का ठीक से दिखाई न देना, मानक गति शांत करने के उपायों की कमी, अनुचित रोशनी, अनुपयुक्त सड़क सरंचना, अनुचित सड़क संकेतक आदि है।
औसत गति में वृद्धि सीधे दुर्घटना होने की आशंका और परिणामों की गंभीरता से संबंधित है। उदाहरण के लिए, औसत गति में हर 1% की वृद्धि घातक दुर्घटना जोखिम में 4% की वृद्धि और गंभीर दुर्घटना जोखिम में 3% की वृद्धि पैदा करती है।

प्रति एक लाख आबादी पर मौत का आंकड़ा घट रहा
वर्ष 2013 के बाद से प्रति एक लाख आबादी पर मृत्यु दर में गिरावट की प्रवृत्ति देखी गई है। वर्ष 2009 से मृत्यु दर में गिरावट देखी जा रही है, लेकिन वर्ष 2018 में, मृत्यु दर में वृद्धि के साथ यह प्रवृत्ति विपरीत हो गई थी । 2022 में, मृत्यु दर लगभग 7 प्रतिशत थी।

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