डूसू चुनाव में प्रचार के दौरान बेंटले, रोल्स रॉयस और फेरारी जैसी महंगी लग्जरी कारों और यहां तक कि जेसीबी के इस्तेमाल पर दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को नाराजगी जताई।
हाईकोर्ट ने कहा, उम्मीदवारों और आयोजकों ने पिछले साल के न्यायिक आदेश से कोई सबक नहीं सीखा, जिसमें सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और उपद्रव के कारण चुनाव परिणाम रोक दिए गए थे। यह बेहद दुखद है, यह हालात पर एक दुखद टिप्पणी है, समाज के हमारे लोकतांत्रिक कामकाज पर एक दुखद टिप्पणी है, यहां के संस्थानों के लोकतांत्रिक कामकाज पर एक दुखद टिप्पणी है। छात्र संघ चुनावों में इस तरह के प्रचार से बुरा और क्या हो सकता है। जेसीबी, बड़ी और लग्जरी कारों, चार पहिया वाहनों का इस्तेमाल, उन्हें इतनी बड़ी कारें - बेंटले, रोल्स रॉयस और फेरारी - कहां से मिलती हैं? छात्रों को ये कैसे मिल रही हैं? चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा, हमने इन कारों के बारे में सुना भी नहीं है। सूत्रों के अनुसार, हाईकोर्ट ने नवनिर्वाचित डूसू अध्यक्ष आर्यन मान और उपाध्यक्ष राहुल झांसला को नोटिस जारी किया।
इसके अलावा सचिव कुणाल चौधरी और संयुक्त सचिव दीपिका झा को भी नोटिस भेजा गया है। हाईकोर्ट ने कहा, छात्र संघ के चुनाव-चाहे डीयू के हों या इसके अन्य संबद्ध महाविद्यालयों के एक वार्षिक कार्यक्रम बन गए हैं और जिस तरह से इन चुनावों ने वर्षों से आकार लिया है, वह प्रत्येक जिम्मेदार संस्थान व नागरिक के लिए चिंता का विषय है।
ऐसा प्रतीत होता है कि छात्रों ने पिछले साल के आदेश से कोई सबक नहीं सीखा है... सबसे ज्यादा निराश तो हम छात्रों से हैं। इसने विश्वविद्यालय के साथ सहयोग के लिए पुलिस की भी सराहना की। 2024 में उम्मीदवारों व समर्थकों द्वारा किए गए विरूपण को देखते हुए, उच्च न्यायालय ने पोस्टर, होर्डिंग और भित्तिचित्रों सहित सभी विरूपण सामग्री को हटाए जाने और सार्वजनिक संपत्ति को बहाल किए जाने तक परिणामों पर रोक लगा दी।
सुनवाई के दौरान, पीठ को बताया गया कि 18 सितंबर को हुए चुनावों के परिणाम घोषित किए गए हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि उम्मीदवार रहे सात छात्रों को कार्यवाही में पक्ष बनाया जाए। अदालत ने इन छात्र उम्मीदवारों को नोटिस जारी किए।
अदालत ने विजय जुलूस पर लगा दी थी रोक
अदालत ने अपने 17 सितंबर के आदेश में दिल्ली विश्वविद्यालय के उम्मीदवारों और छात्र संगठनों को डूसू चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद राष्ट्रीय राजधानी में कहीं भी विजय जुलूस निकालने पर रोक लगा दी थी। याचिकाकर्ता, अधिवक्ता प्रशांत मनचंदा ने पीठ के सामने कई तस्वीरें और समाचार रिपोर्ट साझा कीं और न्यायिक आदेश और लिंगदोह समिति की सिफारिशों के उल्लंघन का दावा किया।