अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने लगभग 30 साल पुराने भ्रष्टाचार के मामले में पुलिस असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (एएसआई) बलदेव सिंह की दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति चंद्रशेखरन सुधा की एकल पीठ ने आरोपी की अपील खारिज करते हुए कहा कि गवाहों की गवाही में छोटी-मोटी कमियां रिश्वत की मांग और स्वीकृति के स्पष्ट प्रमाण को प्रभावित नहीं करती।
मामला वर्ष 1995 का है, जब शकूर बस्ती पुलिस पोस्ट में तैनात एएसआई बलदेव सिंह पर शिकायतकर्ता से उसके भाई द्वारा दर्ज शिकायतों के संबंध में परेशान न करने के बदले 10,000 रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगा था। बाद में बात 5,000 रुपये पर तय हुई। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने ट्रैप लगाया और आरोपी से रिश्वत की राशि बरामद की गई। ट्रायल कोर्ट ने अगस्त 2001 में भ्रष्टाचार की धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए बलदेव सिंह को अधिकतम ढाई साल की कारावास की सजा सुनाई थी। आरोपी ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।