पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई को चार सप्ताह में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश, अंतरिम राहत देने से इन्कार
- 2023 में बनना था यू-टर्न, अदालत में वादे के बाद भी नहीं हुआ निर्माण
- 8000 से ज्यादा वाहन चालक रोजाना होते हैं परेशान
- आठ किलोमीटर का चक्कर काटकर जाना पड़ता है यू-टर्न नहीं बनने से
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने सरिता विहार आली गांव से बदरपुर जाने वाली सड़क पर यू-टर्न के निर्माण में देरी पर सख्त रुख दिखाया है। अदालत ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने दोनों एजेंसियों से मामले में उठाए गए मुद्दों और उनके समाधान के लिए किए जा रहे प्रयासों का विवरण मांगा है।
कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांबरे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की खंडपीठ को बताया गया कि वर्ष 2021 में सड़क के इस हिस्से पर एक रेड लाइट बंद कर दी गई थी। इसके बाद यात्रियों को यू-टर्न लेने के लिए करीब आठ किलोमीटर का अतिरिक्त सफर तय करना पड़ रहा है। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस व्यवस्था से लगभग 8,000 वाहन प्रभावित हो रहे हैं। इसके चलते लोगों को ट्रैफिक जाम, समय की बर्बादी और पर्यावरण संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
दो महीने में निर्माण का दिया था आश्वासन
याचिकाकर्ता ने अदालत के एक मई 2023 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने दो महीने के भीतर यू-टर्न का निर्माण पूरा करने का आश्वासन दिया था। इस हिसाब से अगस्त 2023 तक यू-टर्न चालू हो जाना चाहिए था, लेकिन कई बार शिकायत और प्रतिनिधित्व देने के बावजूद काम पूरा नहीं हुआ।
पीडब्ल्यूडी ने कहा-संबंधित सड़क एनएचएआई के अधीन
पीडब्ल्यूडी की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित सड़क फिलहाल एनएचएआई के अधीन है। इसके बाद अदालत ने पीडब्ल्यूडी के अतिरिक्त मुख्य सचिव या सचिव को चार सप्ताह के भीतर शिकायतों पर की गई कार्रवाई का विवरण देते हुए हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर को भी इसी अवधि में यू-टर्न निर्माण से जुड़े मुद्दों के समाधान की योजना स्पष्ट करने को कहा गया।
बैरिकेड हटाने की मांग खारिज
याचिकाकर्ता की ओर से अंतरिम राहत की मांग की गई। कहा गया कि पहले से चालू रेड लाइट पर लगे अस्थायी बैरिकेड तत्काल हटाए जाएं, ताकि यात्रियों को लंबा चक्कर लगाने से राहत मिल सके। इससे ट्रैफिक जाम, ईंधन की खपत और समय की बर्बादी भी कम हो सकती है। हाईकोर्ट ने फिलहाल अंतरिम राहत देने से इन्कार कर दिया।