अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चुनाव आयोग को चुनाव संबंधी कार्यों के लिए सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की ड्यूटी लगाने का सांविधानिक अधिकार है, लेकिन यह भी उसकी जिम्मेदारी है कि इससे शिक्षकों पर अनावश्यक कार्यभार न पड़े और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने यह टिप्पणी शिक्षकों को बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कार्य में लगाए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान की।
अदालत ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को चुनाव कराने के लिए आवश्यक कर्मचारियों की सेवाएं लेने का अधिकार है। हालांकि, बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 की धारा 27 का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गैर-शैक्षणिक कार्यों के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने अदालत को बताया कि किसी भी शिक्षक को स्कूल समय के दौरान चुनाव संबंधी कार्य नहीं दिया जा रहा है। आयोग के अनुसार शिक्षक केवल स्कूल की छुट्टी के बाद बीएलओ का काम करते हैं और उनकी सहायता के लिए स्वयंसेवकों की भी तैनाती की गई है, ताकि नियमित शिक्षण व्यवस्था प्रभावित न हो।
याचिकाकर्ताओं की दलील
याचिका दायर होने के बाद 10 हजार शिक्षकों को स्कूलों में वापस भेजने का आदेश जारी हुआ
याचिकाकर्ताओं ने आयोग के दावों का विरोध करते हुए कहा कि बड़ी संख्या में शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी लगाए जाने से कई सरकारी स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित हुई। उनका यह भी दावा है कि याचिका दायर होने के बाद करीब 10 हजार शिक्षकों को स्कूलों में वापस भेजने का आदेश जारी किया गया, जिससे पहले की व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।
कमजोर वर्ग के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई
याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि सरकारी और नगर निगम स्कूलों के शिक्षकों को बड़े पैमाने पर चुनाव ड्यूटी में लगाया गया, जबकि निजी स्कूलों में पढ़ाई सामान्य रही। इससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों की पढ़ाई सबसे अधिक प्रभावित हुई।
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हाईकोर्ट ने कहा
शिक्षकों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े, महिला शिक्षकों की पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी रखें ध्यान
हाईकोर्ट ने कहा कि यदि शिक्षक पूरे दिन छह से आठ घंटे पढ़ाने के बाद चुनाव संबंधी अतिरिक्त कार्य करेंगे तो उन पर मानसिक और शारीरिक दबाव बढ़ेगा। अदालत ने चुनाव आयोग को शिक्षकों की कार्य परिस्थितियों को मानवीय दृष्टिकोण से देखने और विशेष रूप से महिला शिक्षकों की पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी ध्यान रखने की सलाह दी।
चुनाव ड्यूटी में लगे शिक्षकों पर कार्रवाई नहीं करने का सर्कुलर जारी करने की जरूरत क्यों पड़ी?
सुनवाई के दौरान अदालत ने चुनाव आयोग के उस सर्कुलर पर भी सवाल उठाया, जिसमें स्कूल प्राचार्यों से चुनाव ड्यूटी पर लगे शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने को कहा गया था। कोर्ट ने पूछा कि यदि चुनाव संबंधी कार्य केवल स्कूल समय के बाद कराया जा रहा है, तो ऐसे निर्देश जारी करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। फिलहाल हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को चुनाव आयोग के जवाब पर प्रत्युत्तर दाखिल करने की अनुमति देते हुए मामले की अगली सुनवाई 20 अगस्त के लिए निर्धारित की है।