फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi NCR News: तिहाड़ जेल में कैदियों से मारपीट के आरोप पर हाईकोर्ट सख्त, जेल प्रशासन से मांगा जवाब

विज्ञापन
विज्ञापन
हेड वार्डन को अगली सुनवाई पर तलब, सीसीटीवी फुटेज और मेडिकल रिपोर्ट पेश करने के निर्देश 29 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
विज्ञापन


अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने तिहाड़ जेल में तीन कैदियों के साथ कथित मारपीट और प्रताड़ना के मामले को गंभीर मानते हुए जेल प्रशासन से जवाब तलब किया है। अदालत ने संबंधित जेल अधीक्षक को नोटिस जारी करने के साथ ही आरोपित हेड वार्डन को 29 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति प्रतिबा एम. सिंह और न्यायमूर्ति विकास महाजन की खंडपीठ ने कहा कि जेल के भीतर इस प्रकार की घटनाओं को सामान्य नहीं माना जा सकता और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई आवश्यक है। याचिका के अनुसार, कैदी आशीष उर्फ विकी और दो अन्य कैदियों के साथ 26 जून को जेल परिसर के भीतर कथित तौर पर मारपीट की गई। आरोप है कि हेड वार्डन ने आशीष से 15 हजार रुपये की 'प्रोटेक्शन मनी' की मांग की थी। रकम देने से इनकार करने पर तीनों कैदियों की पिटाई की गई।
विज्ञापन

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिगंत मिश्रा ने अदालत को बताया कि घटना के बाद करीब 15 दिनों तक पीड़ितों को उचित चिकित्सकीय सुविधा भी उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने आरोप लगाया कि जेल प्रशासन ने मामले को दबाने का प्रयास किया। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने जेल प्रशासन को घटना वाले दिन की सीसीटीवी फुटेज अगली सुनवाई पर अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही, तीनों कैदियों का दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में मेडिकल परीक्षण और आवश्यक उपचार कराने के आदेश दिए। अदालत ने जेल के मेडिकल अधिकारी को भी अगली तारीख पर मेडिकल रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक ऋतेश बहरी ने अदालत को बताया कि जेलों में इस तरह की घटनाएं सामान्य हैं और हाल ही में एक कैदी की दूसरे कैदियों द्वारा हत्या का मामला भी सामने आया था। उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट मंगाने की आवश्यकता बताई। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और स्पष्ट किया कि जेल के भीतर हिंसा या प्रताड़ना को किसी भी स्थिति में सामान्य नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों से सख्ती से निपटा जाना चाहिए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें