उच्च न्यायालय ने बुधवार को भाजपा को राहत देते हुए सदन से निलंबित सातों विधायकों को बहाल कर दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने सदन में उपराज्यपाल के अभिभाषण के दौरान कथित तौर पर हंगामा करने पर सभी को सदन से निलंबित कर दिया था। विधायकों द्वारा स्पीकर के फैसले को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय का रुख करने के बाद न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने यह आदेश पारित किया।
सात भाजपा विधायकों- मोहन सिंह बिष्ट, अजय महावर, ओ.पी. शर्मा, अभय वर्मा, अनिल वाजपेई, जीतेंद्र महाजन और विजेंदर गुप्ता ने विधानसभा के शेष बजट सत्र के लिए अपने निलंबन को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी सदस्यों को चर्चा में भाग लेने से अक्षम करने के लिए दुर्भावनापूर्ण ढंग से योजना बनाई गई।
15 फरवरी को आप सरकार की उपलब्धियों को उजागर करने वाले उपराज्यपाल के अभिभाषण को कथित रूप से बाधित करने के लिए सदस्यों को निलंबित कर दिया गया था। विधायकों ने अपने निरंतर निलंबन के बारे में चिंता व्यक्त की और संभावित विवादास्पद माहौल का संकेत देने वाली हालिया राजनीतिक टिप्पणियों और संदेशों का विरोध किया। विधायकों के वरिष्ठ वकील जयंत मेहता ने 19 फरवरी को दलील दी थी कि निलंबन असंवैधानिक और नियमों के विपरीत है, जिससे कार्यवाही में भाग लेने का उनका अधिकार प्रभावित होता है।