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300 साल पुराने बरगद को नुकसान पर हाईकोर्ट ने निगम से मांगा जवाब

Sat, 08 Aug 2020 06:26 AM IST
दुष्यंत शर्मा अरुण कुमार, नई दिल्ली

सार

  • नई सड़क पर बड़ वाली कोठी में है यह ऐतिहासिक वृक्ष 
  • मुगलिया चकाचौंध से आज तक की हलचलों का साक्षी रहा है बरगद
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यही है ऐतिहासिक बरगद... - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दिल्ली की ऐतिहासिक धरोहरों के बीच चांदनी चौक इलाके में एक ऐसी धरोहर के बारे में पता लगा, जिसका संबंध हिन्दू धर्म की आस्था से करीब 300 सालों से भी ज्यादा समय से जुड़ा हुआ। यह कोई ऐतिहासिक इमारत नहीं, बरगद का एक वृक्ष है। जिस हेरिटेज बिल्डिंग में यह वृक्ष है, इसी के नाम पर उसे बड़ वाली कोठी कहा जाता है। यह वृक्ष की एतिहासिक अहमियत ही है कि बरगद को नुकसान पहुंचने पर सख्त रूख अपनाते हुए हाईकोर्ट ने इसके संरक्षण के लिए उत्तरी दिल्ली नगर निगम से जवाब मांगा है।

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चांदनी चौक स्थित नई सड़क इलाके में यह वृक्ष हेरिटेज बिल्डिंग में है, यह बिल्डिंग भी करीब 300 साल से ज्यादा पुरानी बताई जा रही है। इस वृक्ष के पास ही पहले एक बावड़ी हुआ करती थी, जिसे काफी समय पहले ढक दिया गया है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बरगद की जड़ें इलाके में आधा किमी मीटर से भी ज्यादा दूरी तक फैली हैं।

कुशमाकर रस्तोगी ने बताया कि उनके परदादा ने बढ़ वाली कोठी में 1938 में पगड़ी पर दुकान ली थी। उसके बाद उनके पिता ने दुकान संभाली और अब वह खुद इस दुकान को संभाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि इलाके के पुराने बुजुर्गों का कहना है कि यह वृक्ष 17 वीं सदी का है। बुजुर्गों का अनुमान है कि यह वृक्ष मुगल शासक औरंगजेब के समय का है। 
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उस समय यहां पर इमारत भी या नहीं। इसके बारे में किसी को नहीं पता, लेकिन बाद में जिसने यहां 1100 वर्ग गज जमीन खरीदी, उसके बीच में यह वृक्ष आया था। इस वृक्ष के चारों भवन निर्माण किया गया। यहां पहले लोग रहते थे, लेकिन वर्तमान में यह क्षेत्र व्यवसायिक गतिविधियां में लिप्त हो गया। 

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निर्माण के लिए काट डाली बरगद की शाखएं, हाईकोर्ट सख्त

नई सड़क पर स्थित बड़ वाली कोठी में कथित अवैध निर्माण कार्य के चलते आसपास की दुकानों में आई दरार को लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस याचिका पर संज्ञान लेते हुए पीठ ने सवाल उठाया कि निर्माण के लिए यहां स्थित 300 से साल भी पुराने बरगद की शाखाओं को क्यों काटा गया। इस मुद्दे पर पीठ ने उत्तर दिल्ली नगर निगम और निर्माण ठेकेदार को फटकार लगाई।

न्यायमूर्ति नजमी वजीरी ने इस वृक्ष की कटी हुई उपरी जड़ों और कटी हुई शाखओं को देखकर बेहद नाराजगी जताई। उन्होंने कहा यह वृक्ष दिल्ली के बदलते हुए स्वरूप का गवाह है इसलिए यह एण्क ऐतिहासिक वृक्ष है। उन्होंने पूछा कि आप इस तरह इस धरोहर के साथ ऐसा खिलवाड़ कैसे कर सकते हैं। उन्होंने कहा यह वृक्ष अंग्रेजों के समय से भी पुराना है और यह दिल्ली शहर की ऐतिहासिक धरोहर का हिस्सा है।

यह याचिका बड़ वाली कोठी के बराबद में पीपल वाली कोठी में स्थित दुकानदार नितिन गुप्ता की ओर से दायर की गई है। बड़ की शाखाओं को हो रहे निर्माण को उन्होंन अवैध बताया है और याचिका में कहा है कि इस निर्माण के कारण उनकी और आसपास की अन्य इमारतों में दरारें पड़ गई हैं। अगर इस निर्माण को नहीं रोका गया तो इससे इलाके में बड़ा हादसा हो सकता है।

 पीठ ने इस मामले से जुड़े लोगों की खिंचाई करते हुए दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम को निर्देश दिया कि वृक्ष के संरक्षण के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं। इस मामले में अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी।
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