दिल्ली हाई कोर्ट अनाथ बच्चों की शिक्षा, रहन-सहन और जीवन यापन को लेकर दायर याचिका पर केंद्र और दिल्ली सरकार से शुक्रवार को जवाब मांगा। इस याचिका में इन बच्चों के कल्याण के लिए विस्तृत योजना तैयार करने का अनुरोध किया गया है। मुख्य न्यायाधीसश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए याचिका पर सुनवाई की। इस बीच पीठ ने महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, दिल्ली सरकार और उसके सामाजिक कल्याण विभाग को नोटिस जारी किया।
इसके साथ ही पीठ ने मामले की सुनवाई 2 जुलाई के लिए तय कर दी। यह याचिका हरपाल सिंह राणा की ओर से दायर की गई। इस याचिका में कहा गया कि उन्होंने अनाथ बच्चों के कल्याण, शिक्षा और रहन-सहन के प्रबंध के लिए सरकार द्वारा लाई गई कल्याण योजनाओं पर सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत सूचना मांगी थी, लेकिन उन्हें जो सूचना प्राप्त हुई उनमें अनाथ बच्चों के संबंध में भिन्नता थी।
याचिकाकर्ता ने दायर याचिका में तीन-चार उन मामलों का संदर्भ दिया, जिनमें जिन बच्चों ने अपने माता-पिता खो दिए वे अपने दादा-दादी या नाना-नानी के साथ रह रहे हैं और उन पर आश्रित हैं। याचिका में कहा गय कि एक बच्चा था जिसके माता-पिता मर चुके हैं और उसके छह भाई-बहन हैं, उसने सामाजिक कल्याण विभाग में आवेदन दिया था, जिसने उसे बताया कि विभाग केवल वृद्धावस्था पेंशन, दिव्यांग पेंशन और वितीय सहायता (दिल्ली परिवार लाभ योजना) देता है।
इस याचिका में दावा किया गया कि महिला एवं बाल विकास विभाग ने भी बच्चे को यही जवाब दिया कि चूंकि वह उसकी योजनाओं की पात्रता के नियमों एवं शर्तों के तहत नहीं आता इसलिए उसे किसी प्रकार का लाभ नहीं मिलेगा। याचिका में कहा गया कि ऐसे बच्चों के लिए इन विभागों के पास कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि बेसहारा बच्चे कोविड-19 वैश्विक महामारी के इस दौर में बेहद परेशानी से गुजर रहे हैं और सरकारी नीतियों के अभाव के चलते दुर्दशा झेल रहे हैं। इसलिए इन बच्चों के कल्याण के लिए योजना बनाने के संबंध में सरकार को निर्देश दिए जाएं।