राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण पर दिल्ली हाईकोर्ट पिछले दो वर्ष से केंद्र, दिल्ली व आसपास के राज्यों को चेतावनी दे रही है, बावजूद इसके अदालत के आदेश को हल्के से लिया गया और परिणाम आज राजधानी जहरीले कोहरे में तब्दील हो गई।
अदालत ने प्रदूषण से आम लोगों की घट रही पांच वर्ष आयु, केंद्र व दिल्ली सरकार पर एक दूसरे से बैडमिंटन खेलने और आम जनता को शटल बनाने की टिप्पणियां भी कीं। आखिर में अधिकारियों को जेल भेजने की चेतावनी भी काम नहीं आई।
न्यायमूर्ति बीडी अहमद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण के मुद्दे पर सुनवाई कर रही है। अदालत ने इस मामले में स्वयं संज्ञान लिया था। अदालत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि दिल्ली सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में से एक है।
सांस की बीमारी से देशभर में 10 हजार 650 लोगों की मौत
दिल्ली में जहरीली धुंध
- फोटो : जी पॉल/अमर उजाला
अदालत ने कहा कि आंकड़े बताते हैं कि हर वर्ष सांस की बीमारी से देशभर में 10 हजार 650 लोगों की मौत हो रही है। खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान चिंता जताई कि धुएं से लोगों विशेषकर बच्चों व बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। एक अनुमान के अनुसार, हर व्यक्ति की आयु प्रदूषण के कारण औसतन पांच वर्ष कम हो गई है।
वर्ष 2012 से 2015 के दौरान सैटेलाइट से ली गई जानकारी के आधार पर पता चला कि राजधानी सर्वाधिक पंजाब व हरियाणा से आने वाले धुएं से प्रभावित होती है और ज्यादा वायु प्रदूषण इन्हीं के कारण हो रहा है।
अदालत ने आसपास के चार राज्यों के रेजीडेंट कमिश्नर को तलब करके फसलों के अवशेष यानी पराली को जलाने से रोकने के लिए कहा, आश्वासन मिला लेकिन कार्रवाई नहीं हुई।
किसान अन्न देता है तो मार भी रहा है
दिल्ली में जहरीली धुंध
- फोटो : जी पॉल/अमर उजाला
अदालत ने चिंता जताते हुए कहा कि एक तरफ किसान आम लोगों को खिलाने के लिए फसल उगाता है, तो दूसरी तरफ फसलों को काटने के बाद बचे अवशेष को जलाकर आम लोगों व स्वयं को मारने में लगा है। अदालत ने सुझाव दिया कि इसे इस प्रकार से जलाने से रोकने के लिए किसानों को सब्सिडी दी जाए। फसलों को जलाने वाले को दंडित किया जाना चाहिए, बावजूद कुछ नहीं हुआ।
जेल भेजने की चेतावनी
हाईकोर्ट ने राजधानी में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने की दिशा में ठोस कदम न उठाने पर केंद्र व दिल्ली सरकार व उसके संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों को जेल भेजने पर ही हालत में सुधार की आशा की जाए। कहा कि बार-बार आदेश के बावजूद राजधानी में वायु प्रदूषण कम करने की दिशा में कुछ नहीं हो रहा। कोर्ट ने राजधानी में घटते वन क्षेत्र पर भी चिंता जताई।
11 साल में 990 करोड़ का ईंधन बर्बाद
राजधानी में जाम व चौराहों पर सुस्त यातायात के चलते ईंधन के नुकसान में तेजी से हो रही बढ़ोतरी पर हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि पिछले 11 वर्षों में करीब 990 करोड़ रुपये का ईंधन बर्बाद हो चुका है। वहीं प्रदूषण बढ़ा भी है।
पुराने पेड़ों को रखें सुरक्षित
दिल्ली सरकार ने इंडिया काउंसिल ऑफ फोरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि पुराने पेड़ों को ग्लोबल वार्मिंग के मद्देनजर सुरक्षित रखना चाहिए, क्योंकि इन पेड़ों की जड़ों में अधिक कार्बन होती है।
ढिलाई के चलते ही झेल रहे परेशानी
अदालत ने कहा कि नियमों के पालन में दशकों से बरती जा रही इसी ढिलाई के चलते हम लोग आज परेशानी झेल रहें हैं। केंद्र व दिल्ली सरकार की वायु प्रदूषण को कम करने में दिलचस्पी नहीं है। वह केवल जनता को वोट के लिए इस्तेमाल करती है। सभी सरकारें जिम्मेदारी एक-दूसरे के कंधों पर डाल देती हैं। अगर सरकारें ठीक से शासन नहीं कर पा रहीं हैं, तो वह बता दें।