शादी का मतलब यह नहीं है कि पत्नी हमेशा शारीरिक संबंध के लिए तैयार बैठी है। शादी के बाद पति-पत्नी दोनों को शारीरिक संबंध के लिए इंकार करने का अधिकार है।
इसके लिए पत्नी के साथ शारीरिक बल का प्रयोग अपराध की श्रेणी में आता है। यह टिप्पणी वैवाहिक बलात्कार के एक मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की है।
हाईकोर्ट की मुख्य कार्यवाहक न्यायमूर्ति गीता मित्तल और सी हरी शंकर की पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। पीठ ने कहा कि शादी जैसे रिश्ते में पति और पत्नी दोनों को शारीरिक संबंध बनाने का विरोध करने का अधिकार है।
मामले की सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि यह जरूरी नहीं कि शादी के बाद महिला सेक्स के लिए हर वक्त तैयार बैठी है। पत्नी के आरोपों का विरोध कर रहे पति से पीठ ने कहा कि उसे यह साबित करना होगा कि घटना के दौरान महिला की सहमति थी।