फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Delhi : हाईकोर्ट ने कहा- नाबालिगों को गुड और बैड ही नहीं वर्चुअल टच के बारे में भी बताएं, कोर्स में शामिल करें

Wed, 08 May 2024 06:06 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा, बच्चोंको वर्चुअल टच के बारे में भी सिखाया जाना चाहिए।
विज्ञापन
दिल्ली हाईकोर्ट, Delhi High Court - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हाईकोर्ट ने कहा कि नाबालिग बच्चों को अच्छे और बुरे स्पर्श के बारे में सिखाकर शिक्षित करना चाहिए। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा, बच्चोंको वर्चुअल टच के बारे में भी सिखाया जाना चाहिए।

विज्ञापन


न्यायालय ने बताया कि नाबालिगों को शिक्षित करने में उन्हें उचित ऑनलाइन व्यवहार के बारे में सिखाना, हिंसक व्यवहार के चेतावनी संकेतों को पहचानना और गोपनीयता सेटिंग्स और ऑनलाइन सीमाओं के महत्व को समझना शामिल है।

न्यायाधीश ने कहा, जिस तरह बच्चों को भौतिक दुनिया में सावधानी बरतना सिखाया जाता है, उसी तरह उन्हें ऑनलाइन संपर्कों की विश्वसनीयता का आकलन करने और उनकी व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण सोच कौशल विकसित करने के लिए सिखाने के प्रयास किए जाने चाहिए। इसलिए, उन्होंने संबंधित हितधारकों से वर्चुअल टच और इसके नतीजों और खतरों के बारे में स्कूली पाठ्यक्रम में सामग्री शामिल करने को कहा।
विज्ञापन


अदालत ने कहा, इस मामले में समय की मांग यह भी है कि इस आदेश/निर्णय के माध्यम से स्कूलों और कॉलेजों, दिल्ली राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के साथ-साथ दिल्ली न्यायिक अकादमी जैसे संबंधित हितधारकों को कार्यक्रम, कार्यशालाएं और सम्मेलन आयोजित करने के लिए एक संदेश भेजा जाए। न्यायमूर्ति शर्मा ने 16 वर्षीय लड़की के अपहरण में शामिल आरोपी कमलेश देवी नामक महिला द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें