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दिल्ली हाईकोर्ट: 'बैंक खाता फ्रीज करना जीवन के अधिकार में बाधा', अदालत ने एक याचिका पर सुनवाई में की टिप्पणी

Wed, 13 May 2026 10:28 PM IST
Akash Dubey अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली

सार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि बिना आरोप, प्राथमिकी या न्यायिक आदेश के किसी का खाता बंद नहीं हो सकता और एक व्यक्ति का खाता तुरंत खोलने का निर्देश दिया।
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दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि बैंक खाता व्यक्ति के आर्थिक अस्तित्व का मूल है और बिना किसी आरोप, एफआईआर या न्यायिक आदेश के इसे फ्रीज नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण टिप्पणी की। याचिकाकर्ता का प्राइवेट बैंक में खाता नवंबर 2024 में गुजरात साइबर क्राइम पुलिस की शिकायत पर फ्रीज कर दिया गया था।

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कोर्ट ने कहा, बैंक खाता फ्रीज करना व्यक्ति के जीवन के अधिकार में बाधा डालता है। अदालत ने बैंक को याचिकाकर्ता का खाता तुरंत अनफ्रीज करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति कौरव ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता से किसी अपराध से जुड़ाव का कोई सबूत न होने पर खाता फ्रीज करना पूरी तरह से मनमाना और कानून की नजर में अस्थिर है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना किसी ठोस आधार या कानूनी प्रक्रिया के बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रवृत्ति गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि यह व्यक्ति की आजीविका और आर्थिक स्वतंत्रता को प्रभावित करता है।

याचिकाकर्ता ने गुजरात साइबर क्राइम पुलिस की शिकायत के आधार पर बिना नोटिस या सुनवाई दिए अपने खाते को फ्रीज किए जाने को चुनौती दी थी। कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई एफआईआर दर्ज नहीं थी और न ही कोई अदालती आदेश था। इस फैसले से उन हजारों लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है जिनके खाते साइबर फ्रॉड या अन्य शिकायतों के आधार पर बिना उचित प्रक्रिया के फ्रीज कर दिए जाते हैं।

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