मुख्य न्यायाधीश मनमोहन एवं न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने सभी प्रत्याशियों एवं डीयू प्रशासन को सफाई और दोबारा रंग रोगन करने के लिए 11 नवंबर तक का समय दिया और उनसे सुनवाई से एक दिन पहले तक का स्थिति बताते हुए रिपोर्ट दाखिल करने को कहा। साथ ही 15 उम्मीदवारों को यह वचन देने का निर्देश दिया कि वे भविष्य में किसी भी सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।
मुख्य न्यायाधीश मनमोहन ने कहा, आप छात्र हैं। हम आपको इस तरह से दंडित नहीं करना चाहते हैं, लेकिन आपको अपने द्वारा फैलाई गई गंदगी साफ करनी चाहिए। पीठ ने अपने आदेश में दर्ज किया कि सम्मानित उम्मीदवारों को पूरे विश्वविद्यालय परिसर के साथ-साथ दिल्ली में अन्य स्थानों से पोस्टर, होर्डिंग या भित्तिचित्र अपने खर्च पर हटाने चाहिए। अभियान से सार्वजनिक सड़कों पर जाम, लग्जरी कारों, पोस्टरों, भित्तिचित्रों आदि को दिखाने वाले फ़ोटो और वीडियो का हवाला देने के बाद मुख्य न्यायाधीश मनमोहन ने एबीवीपी के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार ऋषभ चौधरी से मौखिक रूप से कहा, ऐसा लगता है कि आपके पास बहुत सारा धन है। हमने आपके बहुत से पोस्टर देखे हैं। आपने महंगी कारों का इस्तेमाल किया है। आप छात्रों के लिए रोल मॉडल हैं। आपके समर्थकों ने हाईवे को बंद कर दिया। आपको जाकर कैंपस को साफ करना होगा।
आप कैंपस को पेंट करिए। वहां पर अभी भी गंदगी है। दीवार पर गोंद चिपकी है। आप सभी ने पूरी यूनिवर्सिटी को गंदा कर दिया है। आप ही सफाई करेंगे। इससे पहले सभी प्रत्याशियों ने सोमवार को अपने अपने अधिवक्ताओं के माध्यम से कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया। उसमें उन्होंने भविष्य में छात्रसंघ चुनाव के दौरान दीवारों पर पोस्टर नहीं लगाने एवं गंदा नहीं करने की बात कही है। इस दौरान दिल्ली पुलिस की तरफ से स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की गई, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। अदालत ने उम्मीदवारों को निर्देश दिया कि वे सुनवाई की अगली तारीख 11 नवंबर से पहले फोटोग्राफ के साथ व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करें।