अट्ठारह साल के ट्रांसजेंडर शिवी की
अपने मां-बाप से ख़तरा होने की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली पुलिस
को उन्हें सुरक्षा देने के निर्देश दिए हैं.अदालत ने कहा, “भारत
उदारता वाला देश है और उन बातों पर फ़ैसला सुनाना जिन्हें लोग पूरी तरह
समझते नहीं है और अलग लैंगिक पहचान के व्यक्ति को प्रताड़ित करना कट्टरपन
से कम नहीं।”शिवी भारतीय नागरिक हैं पर तीन साल की उम्र से ही
अमेरिका के कैलिफोर्निया में रह रहे हैं। पैदाइश से शिवी लड़की हैं पर अब
वो अपनी लैंगिक पहचान पुरुष मानते हैं।उनके मुताबिक उनकी महिला दोस्त के बारे में पता चलने के बाद ही उनके मां-बाप ने भारत आने की योजना बनाई ताकि उन्हें ‘सुधारा’ जा सके।
माता-पिता ने कहा लड़की हो लड़की की तरह ही रहो
शिवी ने कहा, “आगरा में मेरे बार-बार मांगने पर भी मेरा पासपोर्ट और
ग्रीन कार्ड मुझे नहीं दिया गया, दरअसल उन्हें पता चल गया था कि मैं
ट्रांसजेंडर हूं, मेरी गर्लफ्रेंड है, वो नाराज़ थे। उन्होंने मुझे कहा कि
लड़की की तरह ही रहूं वरना मेरे साथ बहुत बुरा होगा।”शिवी अमेरिका
वापस जाकर अपनी पढ़ाई पूरा करना चाहते हैं और याचिका में उन्होंने अदालत से
अपना पासपोर्ट और ग्रीन कार्ड वापस दिलवाने में मदद मांगी है। शिवी के मां-बाप ने बीबीसी से बात करने से मना कर दिया।शिवी कहते हैं कि उनकी बहुत कोशिशों के बावजूद उनके मां-बाप की नज़र में अब वो वैसी ‘आदर्श लड़की’ नहीं रहे जैसी उन्होंने चाही थी।शिवी
ने कहा, “जैसे उनका मुझपर ज़ोर नहीं चल रहा था, क्योंकि मैंने वैसा इंसान
बनने से मना कर दिया जो मैं नहीं हूं। और इसी वजह से ये सब हो रहा है।”
'जबरन शादी की कोशिश'
शिवी का परिवार इस साल जुलाई में आगरा आया और वहां शिवी को एक शैक्षिक संस्थान, दयाल बाघ एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में दाख़िला करवाया।
शिवी के मुताबिक जब उनकी मां उनके भाई को लेकर अमरीका गईं, उन्हीं दिनों
मौका देखकर शिवी दिल्ली भाग आए और यहां ट्रांसजेंडर मुद्दों पर काम कर रही
संस्था, ‘नज़रिया’ और खुछ मानवाधिकार कार्यकर्ताओं से मदद ली।याचिका
में कहा गया है कि दिल्ली में शिवी के पिता कुछ लोगों के साथ उन्हें
ढूंढने के लिए इन ऐक्टिविस्ट्स के घर पहुंचे। इन लोगों ने खुद को दिल्ली और
उत्तर प्रदेश पुलिस के अफ़सर बताया।दिल्ली हाई कोर्ट ने उत्तर
प्रदेश के रेज़िडेंट कमिश्नर और शिकायतकर्ता के पिता को नोटिस भेजकर उन पर
लगाए गए आरोपों का जवाब मांगा है।शिवी के मुताबिक उन्होंने सोचा था
कि अपने ट्रांसजेंडर होने के बारे में अपने मां-बाप को तब बताएंगे जब वो
नौकरी करने लगें और अपने फ़ैसले को निभाने के लिए सक्षम हों पर ये ऐसे नहीं
हुआ।भारत में पिछले दो महीने का समय शिवी के लिए बहुत मुश्किल रहा
है। उनका आरोप है कि इस दौरान उनके मां-बाप उनकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ उनकी
शादी एक पुरुष से तय करने की कोशिश कर रहे थे।
'काश बदले भारत'
दिल्ली आने के बाद भी भय बना रहा, पर कोर्ट से मिली राहत से उन्हें हिम्मत मिली है। शिवी
कहते हैं, “मैं जिन लोगों के साथ हूं वह मुझे समझते हैं, मैं यहां बिल्कुल
सुरक्षित हूं, भारत के आम लोग भी बहुत अच्छे हैं बस दिक्कत ये कि वह
ट्रांसजेंडर लोगों के बारे में ज़्यादा जानते समझते नहीं।”शिवी को उम्मीद है कि वह अदालत की मदद से अमरीका लौट पाएंगे। क्या वह लौटकर भारत आएंगे? वह
कहते हैं, “पता नहीं, शायद... भारत में अलग लैंगिकता के लोगों की ओर विचार
और माहौल कुछ और परिपक्व हो जाएं तो शायद मैं लौटने की हिम्मत करूं,
फ़िलहाल तो वापस जाना चाहता हूं।”