दिल्ली हाईकोर्ट ने पुलिस बैरिकेड से टकराकर क्रिया शून्य अवस्था में पहुंचे युवक के परिवार को 75 लाख रुपये मुआवजा देने के लिए दिल्ली पुलिस को आदेश दिया है। पीठ ने पुलिस की सभी दलीलों को एक तरफ करते हुए कहा कि सड़क पर बैरिकेड चेन से बंधे हुए थे और वहां पर कोई रिफ्लेक्टर नहीं लगे थे।
न्यायमूर्ति नवीन चावला की एकल पीठ ने कहा कि हादसे में पुलिस की लापरवाही साफ देखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि सड़क पर बैरिकेड पर कोई लाइट नहीं थी और ना ही उन पर रिफ्लेक्टर लगे थे, जिस वजह से वह बाइक सवार को दिखाई नहीं दिए। पीठ ने कहा कि वाहनों के प्रवेश को रोकने के लिए बैरिकेड चेन से बंधे हुए थे, लेकिन अंधेरे की वजह से उचित दूरी से नहीं दिखाई दी।
इस बीच दिल्ली पुलिस ने दलील दी कि बैरिकेड सही स्थान पर थे और साफ दिखाई भी दे रहे थे, लेकिन तेज रफ्तार के कारण बाइक सवार ब्रेक नहीं लगा पाया और हादसे का शिकार हो गया।
पुलिस ने यह भी दलील दी कि हादसे के समय युवक धीरज कुमार और उसके पिता ने हेलमेट नहीं पहना था। वहीं पीड़ित पक्ष के वकील ने कहा कि हादसे के वक्त धीरज ने हेलमेट पहना हुआ था और पुलिस मामले में अपनी लापरवाही को छुपाने के लिए झूठ बोल रही है।
यह हादसा 2015 में दिल्ली के पंजाबी बाग इलाके में दिसंबर माह में तड़के के वक्त हुआ था। हादसे में जख्मी हुआ युवक धीरज उस वक्त 21 साल का था और उसके पिता भी हादसे के वक्त उसके साथ बाइक पर बैठे थे।
हादसे बाद युवक का सफदरजंग अस्पताल में उपचार करवाया गया, जहां से उसे बेहोशी की अवस्था में छुट्टी दी गई। तब से लेकर अब तक युवक की हालत ऐसी है। वह सिर्फ अपने आंखें खोल पाता है, लेकिन किसी इशारा पर प्रतिक्रिया नहीं कर पाता। इस हादसे के बाद पीड़त परिवार ने मुआवजे के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।