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Delhi: उपनिरीक्षक पर यौन शोषण का आरोप, आंतरिक शिकायत समिति के गठन पर पुलिस आयुक्त को नोटिस

Fri, 30 Sep 2022 08:29 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

यह मामला दिल्ली पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर के खिलाफ याचिकाकर्ता की शिकायत पर तीन अगस्त 2021 को मालवीय नगर थाने में दर्ज बलात्कार और धमकी की धाराओं के तहत प्राथमिकी से संबंधित है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
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विस्तार
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उच्च न्यायालय ने यौन उत्पीड़न की शिकायतों के निवारण के लिए दक्षिण दिल्ली डीसीपी को आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के गठन की मांग संबंधी एक महिला पुलिसकर्मी की याचिका पर पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। आरोप है कि उपनिरीक्षक ने उसका यौन शोषण किया। 

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उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, घटना के तीन महीने के भीतर आईसीसी का गठन हो जाना चाहिए था, लेकिन आज तक इसका गठन नहीं किया गया है। जस्टिस अनु मल्होत्रा ने पुलिस आयुक्त के अलावा दिल्ली सरकार व साउथ उपायुक्त को भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने मामले की सुनवाई 19 अक्टूबर को तय की है। 

यह मामला दिल्ली पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर के खिलाफ याचिकाकर्ता की शिकायत पर तीन अगस्त 2021 को मालवीय नगर थाने में दर्ज बलात्कार और धमकी की धाराओं के तहत प्राथमिकी से संबंधित है। अधिवक्ता रणधीर लाल शर्मा के माध्यम से दायर याचिका में पुलिस उपायुक्त हौज खास को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित विशाखा दिशा निर्देश के अनुसार वर्तमान यौन उत्पीड़न की शिकायतों के निवारण के लिए एक आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) का गठन करने का निर्देश देने की मांग की गई है। 
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याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि आरोपी सब इंस्पेक्टर उच्च न्यायालय से अंतरिम सुरक्षा पर है और विभाग में ड्यूटी पर है। स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और याचिकाकर्ता की सुरक्षा के लिए उसे तुरंत निलंबित किया जाना चाहिए। 

याचिका में पूछा गया कि क्या एक अपराधी पुलिस अधिकारी एफआईआर धारा 376 और 506 आईपीसी, 1860 में आरोपी होने के बावजूद सेवा में बनाए रखने के लिए उपयुक्त है।

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नरेला पुलिस को अदालत की फटकार
रोहिणी अदालत ने 6 वर्ष पूर्व दुर्घटना के एक मामले की सही तरीके से जांच नहीं करने पर नरेला पुलिस को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने कहा, पुलिस ने दोषी को पकड़ने का कोई प्रयास नहीं किया और न ही वरिष्ठ अधिकारियों ने दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के लिए कोई ठोस कदम उठाए। इतना ही नहीं दुर्घटना में घायलों तक का पता नहीं है और कार से बरामद 34 शराब की पेटियों को भी बिना अदालत की इजाजत नष्ट कर मामले को दबा दिया।

अदालत ने इस मामले में पुलिस आयुक्त को दोषी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों सहित अन्य के खिलाफ कार्रवाई कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। रोहिणी अदालत स्थित मोटर दुर्घटना दावा न्यायालय के न्यायाधीश विनोद यादव ने मामले का अध्ययन करने के बाद कहा कि नरेला थाना क्षेत्र में 2 जुलाई 2016 को दुर्घटना हुई। ड्राइवर मौके से फरार हो गया और पुलिस ने मौके से स्कोडा ऑक्टेविया गाड़ी बरामद की और उसमें से 34 पेटियां शराब की बरामद की।यह कार सुनीता नाम की महिला के नाम पंजीकृत थी। पुलिस ने दो वर्ष तक मामले की जांच ही नहीं की और महिला से पूछताछ कर यह जानने का प्रयास नहीं किया कि उस समय गाड़ी कोन चला रहा था। 
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