राजधानी में तय मानकों से ऊपर जा चुके वायु प्रदूषण पर हाईकोर्ट ने कड़ी चिंता जताई है। अदालत ने वायु में धूल के कण व अन्य तरीके से प्रदूषण फैलाने वालों पर मात्र जुर्माना करने की अपेक्षा आपराधिक मुकदमा चलाने का निर्देश दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जब कानून में मुकदमे का प्रावधान है तो मात्र जुर्माना क्यों किया जा रहा है। अदालत ने प्रदूषण को रोकने के दिशा में ठोस कदम न उठाने पर केंद्र व दिल्ली सरकार को भी कड़ी फटकार भी लगाई।
न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति संजीव सचदेव की खंडपीठ ने कहा कि बार-बार आदेश के बावजूद दोनों ने कोई सबक नहीं लिया। यही कारण है कि दिन प्रति दिन राजधानी में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है और यह खतरनाक स्थिति में पहुंच गया है।
आप ऐसा करने वालों के खिलाफ मुकदमा क्यों नहीं चलाते
खंडपीठ ने कहा कि जहां विधायिका का काम इसके लिए नियम बनाना है, वहीं, विभिन्न एजेंसियों का काम इन नियमों का पालन करवाना है। लेकिन केंद्र, दिल्ली सरकार व अन्य किसी एजेंसी ने भी अपना काम नहीं किया।
आप मात्र 50 हजार जुर्माने की बात कर रहे है। करोड़ों रुपये के निर्माण पर इस राशि के जुर्माने से प्रदूषण नहीं रुक सकता। आप ऐसा करने वालों के खिलाफ मुकदमा क्यों नहीं चलाते।
संबधित एजेंसियां कुछ सीखने को तैयार नहीं है। चेन्नई की हालत से भी आपने सबक नहीं सीखा।
डीपीसीसी को निर्देश कि सभी नियमों का पालन हो
रीवर वेल्ट की जमीन पर लोगों ने ही नहीं बल्कि सरकारी विभागों ने भी कब्जा कर रखा है। अदालत ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण कमेटी (डीपीसीसी) को निर्देश दिया की वह सुनिश्चित करे की सभी नियमों का पालन हो।
साथ ही डीपीसीसी के वकील संजीव राली को आदेश दिया कि वह 2011 से दिसंबर 2015 के बीच वायु प्रदूषण (पीएम लेवल) के आंकड़ों का प्रति माह के मुताबिक विश्लेषण कर रिपोर्ट दायर करे।
इतना ही नहीं डीपीसीसी प्रदूषण करने वाले लोगों के खिलाफ इस अवधि में की गई कार्रवाई का ब्योरा भी अदालत के समक्ष पेश करे।