हाईकोर्ट ने कहा कि महिलाओं के खिलाफ यौन अपराध बढ़ रहे हैं। ऐसे मामलों में लिप्त अपराधियों के साथ कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। अदालत ने नाबालिग के अपहरण व रेप के मामले में दोषी ठहराए गए तंजीर आलम को मिली तीन वर्ष कैद की सजा को बढ़ाकर सात वर्ष करते हुए यह टिप्पणी की।
न्यायमूर्ति जीएस सिस्तानी और न्यायमूर्ति संगीता धींगरा सहगल की खंडपीठ ने कहा कि अगर ऐसे अपराध होते हैं तो इनसे कड़ाई से निपटा जाना जरूरी है। अदालत ने कहा कि दोषी को भारतीय दंड संहिता के तहत दी जाने वाली सजा उसके अपराध की गंभीरता के अनुसार होनी चाहिए और समाज पर इसका असर होना चाहिए।
खंडपीठ ने कहा कि वर्तमान मामले में अपराध के समय पीड़ित की उम्र 16 साल से भी कम थी और कानून में ऐसे अपराध के लिए सजा न्यूनतम सात साल के सश्रम कारावास की है, जिसे तब ही कम किया जा सकता है जब इसके लिए कोई विशेष और पर्याप्त कारण हों।