अदालत ने उनकी जमानत 50-50 हजार के नीति मुचलके व एक-एक अन्य जमानत राशि पर स्वीकार की है। 11 जून से 20 जून 2017 के बीच सेंगर द्वारा नाबालिग उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता का अपहरण किया गया और उसके साथ दुष्कर्म किया गया। फिर उसे 60,000 में बेच दिया गया, जिसके बाद उसे माखी पुलिस स्टेशन में बरामद किया गया। इसके बाद सेंगर के निर्देशानुसार पुलिस अधिकारियों द्वारा पीड़िता को लगातार धमकाया गया और बोलने के खिलाफ चेतावनी दी गई।
नौ अप्रैल 2018 को दुष्कर्म पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत हो गई। आरोप है कि मामले के कुछ आरोपियों से झगड़े के बाद उन पर हमला किया गया। आरोप था कि उसे माखी थाने ले जाया गया और अवैध असलहा रखने के आरोप में फंसा दिया गया। इसके बाद उन्हें हिरासत में रिमांड पर भेज दिया गया जिसके दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
मामले में कुल सात लोगों को दोषी ठहराया गया था।
उन्नाव दुष्कर्म मामले ने राष्ट्रीय ध्यान तब आकर्षित किया जब बिना नंबर प्लेट वाली एक लॉरी ने उस कार को टक्कर मार दी जिसमें पीड़िता यात्रा कर रही थी। पीड़िता और उसके वकील गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि उसकी दो चाचियों की मृत्यु हो गई। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी चार मामलों की सुनवाई लखनऊ से दिल्ली स्थानांतरित कर दी और आदेश दिया कि इसे दिन-प्रतिदिन के आधार पर चलाया जाए और 45 दिनों के भीतर पूरा किया जाए।