हाईकोर्ट ने दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी (डीएसजीएमसी) को चांदनी चौक स्थित ऐतिहासिक शीशगंज गुरुद्वारा परिसर के बाहर स्थित प्याऊ का वास्तुशिल्प डिजाइन पेश करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने कहा कि डीएसजीएमसी अच्छा वास्तुशिल्प डिजाइन पेश करें, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि प्याऊ से व्यस्त चांदनी चौक में यातायात बाधित नहीं हो रहा है।
अदालत ने कहा कि डीएसजीएमसी उत्तेजित होने की बजाए मामले को निपटाने के लिए आगे बढ़ने के बारे में विचार करें। डीएसजीएमसी एक जिम्मेदार कमेटी है। आपको अदालत के आदेश का आदर करना चाहिए।
भविष्य में प्याऊ का ऐसा डिजाइन बनाए जिससे यातायात प्रभावित न हों और उससे चालकों व राहगीरों को परेशानी न होने पाए। यहां संबंधित सिविक एजेंसियां हैं। अदालत उनकी उपस्थित में डिजाइन को अनुमति देगी लेकिन भविष्य में ऐसा कोई निर्माण न हों जिससे यातायात बाधित हों।
अदालत ने कहा कि कमेटी कानून को अपने हाथ में न लें। आप जिम्मेदार नागरिक हैं। अगर आपको लगता है कि आप अल्पसंख्यक हैं तो संविधान के मुताबिक अपने अधिकारों की सुरक्षा की जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह तभी होगा जब आप अदालत का आदेश का पालन करेंगे। अदालत ने मामले की सुनवाई 10 नवंबर तय की है।
गौरतलब है कि चांदनी चौक के सुंदरीकरण संबंधी याचिका पर गत 28 मार्च को चांदनी चौक में अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था। इस दौरान गत अप्रैल माह में प्याऊ को भी तोड़ा गया था। जिसके बाद कुछ लोगों ने हंगामा किया था और रातोंरात प्याऊ को दोबारा बना दिया था। इस पर हाई कोर्ट ने नाराजगी जताई थी।