दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि भवन एवं अन्य निर्माण मजदूर कल्याण (बीओसीडब्ल्यूडब्ल्यू) बोर्ड में मजदूरों के पंजीकरण में कोताही नहीं होनी चाहिए ताकि कोरोना महामारी के दौरान उन्हें पांच हजार रुपये की अनुग्रह राशि का लाभ मिल सके। इसके साथ ही पीठ ने मजदूरों के पंजीकरण सत्यापन में तेजी लाने के लिए भी कहा है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने बीओसीडब्ल्यूडब्ल्य बोर्ड को सुझाव दिया कि महामारी को देखते हुए आवेदकों के पंजीकरण या नवीनीकरण के ऑनलाइन सत्यापन पर विचार करें ताकि मानव संपर्क को न्यूनतम किया जा सके। यह बोर्ड दिल्ली सरकार के तहत आता है।
कोर्ट में बोर्ड का प्रतिनिधित्व करने वाले दिल्ली सरकार के वकील संजय घोष ने कहा कि अदालत के सुझाव पर विचार किया जाएगा। बोर्ड ने पीठ से कहा कि उसने दिल्ली राज्य कानूनी सेवाएं प्राधिकरण की उस पेशकश को स्वीकार कर लिया है, जिसके तहत 1800 रुपये प्रतिदिन के मानदेय पर प्राधिकरण के 100 वकील आवेदनों का सत्यापन करेंगे।
इस बीच पीठ ने यह भी निर्देश दिया कि वकीलों द्वारा सत्यापन रिपोर्ट देने के बाद बोर्ड को इसके पुन: सत्यापन का काम नहीं करना चाहिए। वकीलों के सत्यापन के बाद और बाधा नहीं खड़ी की जानी चाहिए। हालांकि वकील संजय घोष ने इस आशंका को दूर करते हुए कहा कि काम का दोहराव नहीं होगा। यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता सुनील कुमार अलेदिया की ओर से दायर की गई।
इस याचिका में उन्होंने मांग की कि सभी निर्माण मजदूरों का पंजीकरण बीओसीडब्ल्यूडब्ल्यू के तहत किया जाए, ताकि उन्हें पांच हजार रुपये प्रति महीन का राहत पैकेज मिल सके, जो लॉकडाउन के दौरान हर मजदूर को दिया जा रहा है।