हाईकोर्ट ने लॉकडाउन के कारण यमुना पुश्ता क्षेत्र में फंसे बेघर मजदूरों और अन्य लोगों के लिए पर्याप्त भोजन, पानी और अन्य सुविधाएं सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। इसी के साथ न्यायालय ने इसकी मांग वाली याचिका का निपटारा कर दिया। हालांकि पीठ ने इससे संबंधित दिल्ली सरकार के प्रयासों पर संतुष्टि जताई है।
न्यायमूर्ति हिमा कोहली और सुब्रमणियम प्रसाद की पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनील कुमार अलेदिया की याचिका पर सुनवाई की। याचिका में लॉकडाउन के कारण यमुना पुश्ता क्षेत्र और दिल्ली के अन्य इलाकों में फंसे बेघर लोगों के लिए भोजन, पानी व अन्य सुविधाएं न मिलने का दावा करते हुए सरकार को इस संबंध में निर्देश देने की मांग की गई थी।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि यहां ठहरे लोगों से नजदीक में स्थित शौचालय प्रयोग करने पर पैसे लिए जा रहे हैं। साथ ही, प्रगति मैदान में निर्माण कार्य में लगे मजदूरों के सराय काले खां के नजदीक स्थित कैंप में बिना भोजन और पानी के रहने की शिकायत की गई।
दिल्ली सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल संजय जैन ने दलील दी कि यमुना पुश्ता क्षेत्र में 14 अप्रैल से रह रहे 4229 लोगों में से 3600 को दिल्ली के अलग-अलग स्कूलों में ठहरने के लिए भेजा गया है। 600 लोगों के लिए यमुना स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में व्यवस्था की गई है।