हाईकोर्ट ने कोरोना संक्रमण के मद्देनजर 33 सौ विचाराधीन कैदियों की अंतरिम जमानत बृहस्पतिवार को एक माह के लिए बढ़ा दी। हाईकोर्ट ने आदेश सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित उच्च अधिकार समिति (एचपीसी) की सिफारिश पर दिया है। हाईकोर्ट ने कैदियों को सरेंडर करने का आदेश 20 अक्तूबर को दिया था जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 29 अक्तूबर को रोक लगा दी थी।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति तलवंब सिंह की खंडपीठ ने एचपीसी की सिफारिश पर 3337 विचाराधीन कैदियों को प्रदान अंतरिम जमानत अगले 30 दिनों के लिए आखरी बार बढ़ाई है। एचपीसी ने कैदियों के सरेंडर करने पर जेलों में भीड़ न हो इसके लिए क्राइटेरिया बनाया है। दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता राहुल मेहरा ने पीठ को बताया कि इन कैदियों की अंतरिम जमानत 30 दिनों के लिए बढ़ा दी गई है।
हाईकोर्ट ने 20 अक्तूबर को 2674 कैदियों को दो से 13 नवंबर के बीच सरेंडर करने का निर्देश दिया था। न्यायमूर्ति हिमा कोहली की अगुवाई वाली एचपीसी ने 24 अक्तूबर की बैठक में मौजूदा हालात का जायजा लेते हुए कहा था कि इतने सारे कैदियों को 14 दिन तक आइसोलेट करना जेल प्रशासन के लिए संभव नहीं होगा।