फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हाईकोर्ट का निर्देश, लॉकडाउन में अभिभावकों से नहीं लिया जा सकता वार्षिक और विकास शुल्क

Sun, 30 Aug 2020 02:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली  
विज्ञापन
delhi high court
विज्ञापन

दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि मौजूदा लॉकडाउन के दौरान स्कूलों के बंद रहने तक छात्रों के अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लिया जा सकता। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभिभावक इस बीच ट्यूशन फीस अनिवार्य रूप से देंगे।

विज्ञापन


न्यायमूर्ति जयंत नाथ की एकल पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए निजी स्कूल के अभिभावकों के संगठन की याचिका पर 25 अगस्त को यह निर्देश दिया। इस याचिका में स्कूला द्वारा जुलाई से ट्यूशन फीस के साथ वार्षिक और विकास शुल्क लिए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है। 

इस याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने निजी स्कूलों को जुलाई से वार्षिक और विकास शुल्क लेने से रोक दिया है। इसके साथ ही पीठ ने इस मामले में दिल्ली सरकार और संबंधित स्कूल को नोटिस जारी करके जवाब भी मांगा है। इस मामले में अगली सुनवाई 16 सितंबर के लिए सूचीबद्ध की गई है।
विज्ञापन


सुनवाई के दौरान निजी स्कूल की ओर से दलील दी गई कि लॉकडाउन खत्म हो चुका है, इसलिए वह वार्षिक और विकास शुल्क ले सकता है। हालांकि, दिल्ली सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त स्थायी वकील गौतम नारायण ने कहा कि शिक्षा निदेशालय ने 18 अप्रैल के अपने सर्कुलर में स्कूलों को लॉकडाउन की अवधि में वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लेने को कहा था। 

यह सर्कुलर अब भी लागू है क्योंकि स्कूल खुले नहीं हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पीठ ने स्पष्ट किया मौजूदा लॉकडाउन के दौरान अभिभावकों से वार्षिक और विकास शुल्क नहीं लिया जा सकता।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें