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क्यों फूंके जाते हैं रावण के 10 हजार पुतले, दिल्ली सरकार बनाएं गाइड लाइन : हाईकोर्ट

Tue, 16 Oct 2018 09:54 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रावण
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हाईकोर्ट ने प्रदूषण के मद्देनजर दशहरे पर रावण दहन और पटाखों के जलाने को लेकर केंद्र व दिल्ली सरकार को गाइड लाइन बनाने के निर्देश दिए हैं। ताकि अगले साल से इसे लागू किया जा सके। दरअसल, राजधानी में जगह-जगह रावण के पुतलों का दहन किया जाता है, जिससे प्रदूषण तो फैलाता ही है सुरक्षा को लेकर भी भय बना रहता है। इस संबंध में एक ऑटो चालक की ओर से दायर की गई याचिका पर न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और एके चावला की पीठ ने यह निर्देश दिया है। 

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हाईकोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से कहा कि क्या आप दिल्ली के लोगों को स्वच्छ सांस नहीं लेने देना चाहते। राजधानी में जगह-जगह रावण के करीब 10 हजार से ज्यादा पुतले फूंकने की क्या जरूरत है। इन्हें कम करने के लिए गाइड लाइन बनानी चाहिए ताकि दशहरे के मौके पर प्रदूषण को कम किया जा सके। कोर्ट अब इस मामले की सुनवाई 22 नवंबर को मुकर्रर की है। सुनवाई से पहले केंद्र और दिल्ली सरकार से इस संबंध में उठाए गए कदम की जानकारी भी मांगी है।      

याचिका में ऑटो चालक केके राय ने कहा है कि उसका जिला दिल्ली के क्षेत्रफल में काफी बड़ा है, लेकिन वहां रावण का सिर्फ एक पुतला फुंका जाता है, लेकिन दिल्ली में हर साल 10 हजार से ज्यादा रावण के पुतले फूंके जाते हैं। 
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केंद्र का दावा, उठाए गए हैं जरूरी कदम
केंद्र ने पीठ के समक्ष दलील दी है कि राजधानी में प्रदूषण कम करने के लिए इमरजेंसी एक्शन प्लान लागू किया गया है। इसके तहत बदरपुर थर्मल पॉवर प्लांट को बंद किया गया है। मशीनों से सड़कों की सफाई कर पानी का छिड़काव किया जा रहा है। पराली के धुएं को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। केंद्र ने दावा किया है कि इन प्रयासों के चलते राजधानी में पीएम 10 और पीएम 2.5 के स्तर में गिरावट दर्ज हुई है।  

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