जहां दिल्ली में ई-रिक्शा को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिती बनी हुई है वहीं त्रिपुरा ऐसा पहला राज्य बन गया है जहां बैटरी से चलने वाले वाहनों के लिए विशेष कानून को अमली जामा पहना दिया गया है।
त्रिपुरा ने 1988 में बने मोटर व्हिकल एक्ट में संशोधन करते हुए त्रिपुरा बैटरी ऑपरेटेड रिक्शा रूल्स 2014 का निर्माण किया है। इस कानून के बनने से अब शहरी क्षेत्र में बैटरी से चलने वाले ई-रिक्शा पर किसी तरह का कानून प्रतिबंध नहीं रह जाएगा।
राजधानी में चल रहे बवाल से निपटने के लिए त्रिपुरा की तर्ज पर कदम उठाया जा सकता है।
ई-रिक्शा पर त्रिपुरा ने बनाया कानून
जहां दिल्ली में ई-रिक्शा को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिती बनी हुई है वहीं त्रिपुरा ऐसा पहला राज्य बन गया है जहां बैटरी से चलने वाले वाहनों के लिए विशेष कानून को अमली जामा पहना दिया गया है।
त्रिपुरा ने 1988 में बने मोटर व्हिकल एक्ट में संशोधन करते हुए त्रिपुरा बैटरी ऑपरेटेड रिक्शा रूल्स 2014 का निर्माण किया है। इस कानून के बनने से अब शहरी क्षेत्र में बैटरी से चलने वाले ई-रिक्शा पर किसी तरह का कानून प्रतिबंध नहीं रह जाएगा।
जनवरी में इस कानून को प्रकाशित करते हुए कहा गया है कि किसी भी ईरिक्शा चालक के लिए वाहन चलाने का लाइसेंस अनिवार्य होगा। चालक की उम्र 20 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। यह लाइसेंस तीन साल के वैध होगा बशर्ते इस दौरान चालक किसी ट्रैफिक रूल न करे।
ऐसे चल सकता है
बैटरी से चलने वाले ई-रिक्शा के लिए लाइसेंस बनाने की फीस 300 रूपए है जबकि इसे रिन्यू करने के लिए मात्र 100 रूपए ही देने होंगे। चालक को रोड टैक्स के रूप में साल भर के मात्र 100 रूपए देने होंगे।
इस नियम में ये भी बताया गया है कि अरबन लोकल बॉडी के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर लेवल के अधिकारी वाहन की जांच के बाद उसे तकनीकी अनुमोदन देंगे।
हर रिक्शा चालक को इंश्योरेंश कवर भी प्राप्त होगा। ई रिक्शा केवल शहरी क्षेत्र में ही चलेगा और सभी रिक्शा को रजिस्ट्रेशन नंबर भी दिया जाएगा।
दिल्ली हाईकोर्ट का निर्देश
दिल्ली में ई-रिक्शा पर प्रतिबंध को हटाने के लिए बैटरी रिक्शा कल्याण संघ की ओर से दायर साचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इस पर 8 अगस्त तक के लिए रोक लगा दी है।
हाईकोर्ट ने कहा कि ई-रिक्शा लोगों की जान के लिए खतरा हैं और बिना किसी उचित गाइडलाइन के इसका परिचालन अवैध है।
बता दें कि बैटरी रिक्शा कल्याण संघ ने लाखों लोगों के जीवन-यापन का हवाला देते हुए ई-रिक्शा के पंजीकरण तक उसे चलाने की इजाजत देने का आग्रह कोर्ट से किया था।
कोर्ट ने याची से पूछा सवाल?
संघ के अधिवक्ता आरके कपूर ने सोमवार को न्यायमूर्ति बीडी अहमद व न्यायमूर्ति सिद्घार्थ मृदुल की खंडपीठ के समक्ष याचिका पेश की। उन्होंने याचिका पर न्यायिक हित में जल्द से जल्द सुनवाई करने का आग्रह करते हुए खंडपीठ से अपने 31 जुलाई को प्रतिबंध लगाने संबंधी फैसले की पुन: समीक्षा करने को कहा था।
खंडपीठ ने सुनवाई करने की हामी भरते हुए कहा कि राजधानी में ई-रिक्शा चलाने के लिए उसका नियमन करना जरूरी है। आप यातायात के नियमों को अच्छी तरह से जानते हैं।
खंडपीठ ने याची से पूछा कि जब तक ई-रिक्शा को नियंत्रित नहीं किया जाता, तब तक उसे चलाने की अनुमति कैसे दी जा सकती है।
दिल्ली में 70 हजार ई-रिक्शा
अधिवक्ता ने कहा कि राजधानी में राजधानी में करीब 70 हजार ई-रिक्शा चल रहे हैं और लाखों लोग अपने जीवन यापन के लिए इन पर निर्भर हैं। मंत्रालय ने मोटर वाहन अधिनियम में संशोधन का निर्णय लिया है और इस दिशा में प्रयास जारी है।
इसी संबंध में एडवाइजरी जारी की गई है। ऐसे में जब तक ई-रिक्शा का पंजीकरण व अन्य नियमन संबंधी प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक ई-रिक्शा को चलाने की मंजूरी दी जाए। उन्होंने यह भी कहा कि तब तक यातायात पुलिस व स्थानीय प्रशासन कुछ नियम तय कर सकता है।
गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने गैरकानूनी रूप से चल रहे ई-रिक्शा से संचालन पर 31 जुलाई को रोक लगा दी थी। अदालत ने इस मामले पर 14 अगस्त को सुनवाई तय करते हुए सभी पक्षों से जवाब मांगा था