महिलाएं देश की आधी आबादी हैं और उन्हें कार्य स्थल पर प्राथमिकता व सम्मान मिलना ही चाहिए। मालिकों व नियोक्ताओं को ऐसी महिलाओं के काम के नतीजों को लेकर सहानुभूति रखनी चाहिए जो गर्भवती हैं।
हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी महिला अतिथि शिक्षक की याचिका पर फैसला सुनाते हुए की। याचिकाकर्ता के योग्य होने के बाद भी उसका नाम शिक्षकों की सूची से काट दिया गया था क्योंकि वह दस्तावेजों की जांच के लिए देरी से पहुंची थी।
न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह याची योगिता चौहान को अपने मौजूदा अतिथि शिक्षकों की सूची में शामिल करे। इस महिला का कहना था कि सिजेरियन डिलीवरी की वजह से वह दस्तावेजों की जांच के लिए देरी से पहुंची थी।
अदालत ने कहा कि शिक्षा विभाग महिला की मेडिकल फिटनेस के आधार पर अपनी जरूरत के हिसाब से उसकी सेवाओं का लाभ ले। सरकार को इस संबंध में दो हफ्तों के भीतर आदेश जारी करने के लिए कहा गया है।