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गर्भवती महिलाओं के प्रति सहानुभूति रखें नियोक्ता, हाईकोर्ट ने महिला शिक्षक की याचिका पर की टिप्पणी

Fri, 14 Dec 2018 06:31 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली
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महिलाएं देश की आधी आबादी हैं और उन्हें कार्य स्थल पर प्राथमिकता व सम्मान मिलना ही चाहिए। मालिकों व नियोक्ताओं को ऐसी महिलाओं के काम के नतीजों को लेकर सहानुभूति रखनी चाहिए जो गर्भवती हैं। 
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हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी महिला अतिथि शिक्षक की याचिका पर फैसला सुनाते हुए की। याचिकाकर्ता के योग्य होने के बाद भी उसका नाम शिक्षकों की सूची से काट दिया गया था क्योंकि वह दस्तावेजों की जांच के लिए देरी से पहुंची थी।  

न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि वह याची योगिता चौहान को अपने मौजूदा अतिथि शिक्षकों की सूची में शामिल करे। इस महिला का कहना था कि सिजेरियन डिलीवरी की वजह से वह दस्तावेजों की जांच के लिए देरी से पहुंची थी। 
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अदालत ने कहा कि शिक्षा विभाग महिला की मेडिकल फिटनेस के आधार पर अपनी जरूरत के हिसाब से उसकी सेवाओं का लाभ ले। सरकार को इस संबंध में दो हफ्तों के भीतर आदेश जारी करने के लिए कहा गया है।  
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अदालत ने अपने फैसले में इस बात पर गौर किया कि 26 जुलाई 2017 में जारी पब्लिक नोटिस के आधार पर तैयार अतिथि शिक्षकों का पैनल चल रहा है लेकिन योग्य होने के बाद बाद भी उसे शामिल नहीं किया गया। अदालत ने यह भी कहा कि अतिथि शिक्षकों से सरकारी खजाने पर बोझ भी नहीं बढ़ता। 

याचिका दायर करने वाली शिक्षक ने मांग की थी कि शिक्षा विभाग के 24 अप्रैल के आदेश को निरस्त करके उसे ज्वाइनिंग लेटर जारी करने का निर्देश दिया जाए। याची का दावा था कि मौजूदा सत्र के लिए उसका चयन हुआ था लेकिन इसी बीच उसने सीजेरियन से बच्चे को जन्म दिया। 

इस कारण वह दस्तावेजों की जांच के लिए तय तारीख पर नहीं पहुंच पाई। शिक्षा विभाग ने इस आधार पर उसके चयन को रद कर दिया जबकि अतिथि शिक्षकों के अभी भी 11 पद खाली हैं।
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