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छात्रों के खिलाफ कोर्ट ने मुकदमा किया रद्द, गुरुद्वारे में कार सेवा का दिया निर्देश

Mon, 14 Mar 2016 10:49 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोर्ट - फोटो : file photo
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हाईकोर्ट ने कहा कि मामूली मुद्दों को लेकर बेवजह हिंसा स्थानीय पहचान बन चुकी है इस तरह के चलन से आम लोग प्रभावित होते हैं जिससे अफरातफरी और अराजकता की स्थिति पैदा होती है।
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न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल ने यह टिप्पणी उस प्राथमिकी को रद्द करने का आदेश देते समय की जिसे यहां के एक स्थानीय संस्थान के छात्रों के खिलाफ खतरनाक हथियारों का इस्तेमाल करके घायल करने को लेकर दर्ज की गई थी।

प्राथमिकी एक इंजीनियरिंग कॉलेज में पिछले वर्ष अक्तूबर में चुनावों के दौरान दो गुटों में हुई मारपीट मामले में की गई थी। अदालत ने कहा मामूली मुद्दों या बिना मुद्दे के बेवजह हिंसा दिल्ली में स्थानीय पहचान बन चुकी है।
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कोई भी इस तरह की हिंसा के चलन के अंदेशे से सिहर सकता है। अदालत ने सभी छात्रों के खिलाफ मुकदमों की कार्यवाही के आदेश को सशर्त रद्द कर दिया।
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'कार सेवा स्वैच्छिक सेवा है'

अदालत - फोटो : file
अदालत ने सभी छात्रों को चार सप्ताह तक सप्ताह में एक बार शनिवार को स्थानीय गुरुद्वारे में कार सेवा का आदेश दिया। अदालत ने गुरुद्वारा के प्रबंधन से आग्रह किया कि वे छात्रों से अपनी सुविधानुसार उचित कार सेवा कराकर उन्हें इसका प्रमाणपत्र प्रदान करें।

अदालत ने स्पष्ट किया कि कार सेवा स्वैच्छिक सेवा है और छात्र उसे अपने व्यक्तिगत रिकॉर्ड के रूप में प्रयोग नहीं करेंगे। नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के छात्रों ने याचिका दायर कहा था कि दोनों पक्षों ने आपसी रजामंदी से समझौता कर अपने विवाद को सुलझा लिया है।

याची छात्रों के अधिवक्ता अमित साहनी ने अदालत को बताया कि सभी छात्र है और प्राथमिकी से उनके भविष्य पर असर पड़ेगा। अदालत में उपस्थित सभी छात्रों ने अदालत को आश्वासन दिया कि वे भविष्य में इस प्रकार की गतिविधियों में लिप्त नहीं होंगे और अच्छा व्यववहार रखेंगे।

पिछले वर्ष 14 अक्तूबर 2015 को कॉलेज में सांस्कृतिक कार्यक्रम व चुनावों के दौरान छात्रों के दो गुटों में विवाद हो गया था। इस दौरान छात्रों ने एक दूसरे पर सर्जिकल ब्लेड से हमला कर बुरी तरह घायल कर दिया था। अदालत ने प्राथमिकी रद्द करते हुए एक मुहावरे का उदाहरण देते हुए कहा कि राजनीति एक युद्ध है यानि युद्ध और प्यार में सब जायज है।
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