केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बेंच की मांग को जायज ठहराते हुए इसे जनता की जरूरत बताया है।
यह बात उन्होंने शुक्रवार को उनसे मिले पश्चिम के अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल से कही। उन्होंने आश्वस्त किया कि केंद्र सरकार इस मामले में बेहद गंभीर है। इस पर जल्द ही उचित फैसला लिया जाएगा।
वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बेंच की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री डॉ. संजीव बालियान के नेतृत्व में अधिवक्ताओं के प्रतिनिधिमंडल ने राजनाथ सिंह से मुलाकात की।
अधिवक्ताओं से उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट बेंच पश्चिम की जनता के लिए जरूरी है। इसलिए कि इस क्षेत्र की जनता शीघ्र और सस्ते न्याय से काफी दूर है। इसे लेकर केंद्र सरकार का रुख सकारात्मक है।
उन्होंने आश्वस्त किया कि वे इस मांग को लेकर जल्द ही केंद्रीय विधि मंत्री सदानंद गौड़ा, केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली से बात करेंगे। इस संबंध में जल्द ही प्रधानमंत्री से भी बातचीत की जाएगी। इस दौरान अधिवक्ताओं ने राजनाथ सिंह को प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल में केंद्रीय संघर्ष समिति के चेयरमैन डीडी शर्मा, महामंत्री अनिल कुमार जंगाला, गजेंद्र सिंह धामा, एमपी शर्मा, गाजियाबाद से अनिल पंडित, सुरेंद्र राठी, योगेंद्र कौशिक, संजीव, मुजफ्फरनगर से आरपी शर्मा, सुरेंद्र मलिक, ठाकुर अनूप सिंह शामिल थे।
राजनाथ से 45 मिनट बातचीत:
डीडी शर्मा ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री ने अधिवक्ताओं का पक्ष बेहद शालीनता से सुना। वेस्ट यूपी में बेंच को लेकर उनका रुख सकारात्मक रहा। आश्वासन भी दिया कि इस मसले पर शीघ्र ही फैसला होगा। वार्ता राजनाथ के आवास पर करीब 45 मिनट चली।
मेरा समर्थन पहले भी था, आज भी है
राजनाथ ने कहा कि इस मांग और अधिवक्ताओं के आंदोलन की जानकारी उन्हें अपने मुख्यमंत्री काल से ही है। वह उस समय भी इसके समर्थन में थे और आज भी हैं।
हाईकोर्ट में पेंडिंग केस पर चिंतित
अधिवक्ताओं द्वारा हाईकोर्ट में पेंडिंग केस के बारे में जानकारी देने पर राजनाथ ने चिंता जाहिर की। कहा कि बेंच की स्थापना कर पेंडिंग केस के निस्तारण में तेजी लाई जा सकती है।
जजों के आधे पद रिक्त
अधिवक्ताओं ने राजनाथ को बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीशों के कुल 180 पद हैं, जिनमें से आधे रिक्त पड़े हैं। संसाधनों की कमी की वजह से बाकी की नियुक्तियां भी नहीं हो पा रही हैं।
बेंच की स्थापना कर इस कमी को दूर किया जा सकता है। इस पर सहमति जताते हुए राजनाथ ने रिक्त पदों को लेकर चिंता जताई।
23 दिसंबर के बाद होगी चर्चा
राजनाथ ने बताया कि 23 दिसंबर को संसद का शीतकालीन सत्र खत्म होने के बाद इस मुद्दे पर चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि यह मुद्दा सरकार के एजेंडे में है और इस पर सत्र के बाद सकारात्मक फैसला होगा।
आगरा, इलाहाबाद पर कोई चर्चा नहीं
प्रतिनिधिमंडल ने राजनाथ से आगरा और इलाहाबाद की हड़ताल और उनकी मांग पर कोई चर्चा नहीं की। न ही राजनाथ सिंह से इस मुद्दे पर कोई बात हुई कि बेंच कहां स्थापित होनी चाहिए। उनसे सिर्फ वेस्ट यूपी में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना की मांग की गई।