दिल्ली हाईकोर्ट ने राजधानी की सड़कों से कूड़ा नहीं उठाने पर दिल्ली सरकार व एमसीडी को एक बार फिर फटकार लगाई है। अदालत ने कहा डेंगू और चिकनगुनिया रोकने के लिए तमाम आदेश दिए गए हैं, इसके बावजूद कुछ नहीं हो रहा है।
अदालत ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अब भी अदालत के निर्देश का पालन नहीं हुआ तो अधिकारियों को अदालत की अवमानना कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी.हरि शंकर ने एक चैनल की रिपोर्ट पर स्वयं संज्ञान लेते हुए आज विशेष सुनवाई की।
रिपोर्ट में कहा गया है कि राजधानी की सड़कों से कूड़ा नहीं हटाया गया है। अदालत ने कहा कि आपने हलफनामे में कहा है कि राजधानी के सभी क्षेत्र को साफ कर दिया गया है। जबकि मीडिया रिपोर्ट कह रही है कि चार दिनों से कूड़ा नहीं हटाया गया है।
हाईकोर्ट ने कहा है कि मामला बेहद गंभीर है। डेंगू और चिकनगुनिया के मामले में ईस्ट एमसीडी ने जो भी प्रगति रिपोर्ट दाखिल की है यह चैनल की रिपोर्ट से पूरी तरह विपरीत है। यह अदालत की अवमानना है। अदालत ने कहा आप गलत शपथपत्र दाखिल नहीं कर सकते।
आपके जिम्मेदारी से भागने के कारण आम लोग सफर नहीं कर सकता। चैनल ने ईस्ट एमसीडी क्षेत्र में जगह-जगह फैले कूड़े को लेकर समाचार दिखाया है और वह तमाम विषमताएं दिखा रहा है और हलफनामा कुछ और कह रहा है।
अदालत में प्रोजेक्टर द्वारा प्रोग्राम को प्ले किया गया और उसमें तमाम मुद्दे दिखाए गए। ईडीएमसी के कर्मियों के वेतन का भुगतान नहीं होने का मामला, नालों की सफाई के लिए जूते आदि की कमी और अन्य उपकरणों की कमी को भी उजागर किया गया है।
अदालत ने दिल्ली सरकार के शहरी विकास आयुक्त से कहा है कि वह वीडियो देखें। अदालत ने चैनल टीम से कहा है कि वह जहां भी कूड़ा आदि है उसे उच्चस्तर पर निरीक्षण करें और देखें। अदालत ने उन्हें 2 जून को रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
अदालत में अर्जी दाखिल कर कहा गया है कि दिल्ली सरकार और सिविक एजेंसी चिकनगुनिया और डेंगू रोकने के लिए कारगर कदम नहीं उठाए हैं। वहीं दिल्ली सरकार और सिविक बॉडी ने कोर्ट को बताया था कि मच्छर जनित इन बीमारियों को रोकने के लिए तमाम कदम उठाए गए हैं।