गिरफ्तार बदमाशों की पहचान झज्जर हरियाणा निवासी सुनील और नजफगढ़ निवासी मंजीत के रूप में हुई है। द्वारका जिले की वाहन चोरी निरोधक शाखा द्वारका जिले में वाहनों की चोरी के मामले की जांच कर रही थी। पुलिस घटनास्थल से सीसीटीवी कैमरे की जांच के बाद बदमाशों की पहचान करने के बाद उन पर निगरानी रख रही थी। इसी दौरान 9 मार्च को वाहन चोरी करने वाले सुनील के द्वारका सेक्टर 26 के बाजार में चोरी की इग्निस कार के साथ मौजूद होने की जानकारी मिली।
निरीक्षक कमलेश कुमार के नेतृत्व में टीम वहां दबिश देकर सुनील और उसके साथी मंजीत को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान इनके पास से दो पिस्टल और दस कारतूस मिले। जांच में पता चला कि कार को सफदरजंग एन्कलेव इलाके से चुराई गई थी। पूछताछ में दोनों ने दिल्ली एनसीआर की विभिन्न लग्जरी कार चोरी की घटनाओं में शामिल होने का खुलासा किया। उनके खुलासे के बाद पुलिस ने चोरी की पांच लग्जरी कारें बरामद कर ली।
जांच में पता चला कि बदमाश वाहनों की चोरी कर उसे बिहार के पूर्वी चंपारण के रहने वाले अमजद रजा खान को बेच देता था। पुलिस टीम पूर्वी चंपारण में छापेमारी कर खरीदार अमजद राजा खान को गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से एक पिस्टल, चार कारतूस और चोरी की एक स्विफ्ट कार बरामद कर ली। आरोपी ने बताया कि आसानी से पैसा कमाने के लिए वह सुनील से चोरी की कई कारें खरीदी और कई लग्जरी कारों को अरुणाचल निवासी नकलम बिसई को बेच दिया। पुलिस की टीम अरुणाचल प्रदेश पुलिस के साथ मिलकर नकलम बिसई को गिरफ्तार कर लिया। उसके कब्जे से पुलिस ने तीन ब्रेजा कारें बरामद की। आरोपी ने बताया कि वह एक ट्रैवल एजेंसी चलाता है। कारोबार के दौरान वह अमजद राजा खान के संपर्क में आया। उसने उसे ट्रैवल एजेंसी में इस्तेमाल करने के लिए कम कीमत पर चोरी के वाहन खरीदने के लिए कहा। उसने बताया कि वह अमजद को रंग और मॉडल वाली कारों की डिमांड बता देता था और फिर उसकी तरह की कार मिलने पर खरीद लेता था। उसने अबतक चार कारें खरीदी हैं।
पुलिस से बचने के लिए बदमाश वॉकी टॉकी पर करते थे बात
जांच के दौरान बदमाशों के पास से तीन वॉकी टॉकी मिला है। बदमाशों ने बताया कि मोबाइल के इस्तेमाल से पकड़े जाने का डर रहता है। पुलिस बदमाशों के मोबाइल को सर्विलांस रखती है, जिससे वह आसानी से पकड़े जाते हैं। इससे बचने के लिए वह वॉकी टॉकी पर ही बात करते थे। इसके साथ ही बदमाशों ने बताया कि वह वाहनों की चोरी करने के लिए हाईटेक तरीके अपनाते थे। वह सबसे पहले बाइक से उन लग्जरी वाहनों की रेकी करते थे, जिसकी चोरी करनी होती थी। वह ग्राहकों के डिमांड पर चोरी करते थे। कार की पहचान करने के बाद उसकी चोरी करने के लिए वह अपने साथ साढ़े तीन सौ चाबी, कई कार में प्रोग्रामिंग होता है, इसके लिए अपने साथ करीब डेढ़ लाख कीमत की प्रोग्रामिंग मशीन और जीपीएस सिस्टम को रोकने के लिए जैमर का इस्तेमाल भी करते थे।
मेरठ के वाहन चोर के मार्फत बिहार के खरीदार से की जान पहचान
बदमाश सुनील ने बताया कि उस पर डकैती, वाहन चोरी और आबकारी अधिनियम के 12 मामले दर्ज हैं। वाहनों की चोरी के दौरान वह मेरठ निवासी वसीम के संपर्क में आया, जो लग्जरी वाहनों की चोरी में शामिल था। वसीम के जरिए वह बिहार के अमजद रजा खान के संपर्क में आया और फिर उसके जरिए उत्तर पूर्वी राज्यों असम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में चोरी की वाहन को बेचने लगा।