हाल के दिनों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में घटने वाली हर छोटी-बड़ी घटना को सांप्रदायिक रूप देने की हाई-टेक कोशिश की जा रही है। मामला चाहे अंतरजातीय विवाह का हो, प्रेम प्रसंग हो, प्रेमी जोड़े के भाग कर शादी करने का हो या बलात्कार हो।
ऐसे सभी मामलों में दोनों पक्षों के धर्म को उजागर करने और उसे ही मुद्दा बनाने की कोशिश की जाती है जिससे इलाके का सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ा जा सके। इस बात का खुलासा गाजियाबाद पुलिस की लोकल इंटेलीजेंस की एक रिपोर्ट में हुआ है।
इंटेलीजेंस ने एसएसपी को सौंपी रिपोर्ट
कुछ असामाजिक तत्व जिले को दंगे की आग में जलाने की साजिश कर रहे हैं। रविवार को गाजियाबाद के निकट लोनी में हुआ बवाल भी इसी साजिश का हिस्सा था। ये सनसनीखेज तथ्य गाजियाबाद इंटेलीजेंस टीम की खुफिया जांच में सामने आए हैं।
इंटेलीजेंस ने एसएसपी को इस संबंध में रिपोर्ट दी है। एसएसपी शासन को ये रिपोर्ट भेज रहे हैं। एसएसपी धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि जो असामाजिक तत्व दंगे की साजिश कर रहे हैं, उन्हें चिन्हित कर लिया गया है। उनके खिलाफ पुलिस के पास पर्याप्त और पुख्ता सुबूत हैं। ऐसे लोग पुलिस के रडार पर हैं। उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रिपोर्ट : अरीश रिज़वी
हर मामले को दिया जा रहा सांप्रदायिक रंग
पुलिस सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में लिखा गया है कि कुछ लोग हर मामले को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। इसके लिए सोशल साइट्स फेसबुक, ट्विटर और व्हाट्स एप का भी सहारा ले रहे हैं।
ये असामाजिक तत्व कोई भी घटना होते ही सोशल साइट्स पर सांप्रदायिक भावनाएं भड़काने वाले मैसेज फ्लैश करना शुरू कर देते हैं। अफवाहें फैलाते हैं, ताकि लोग आक्रोशित हों। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने ऐसे लोगों के खिलाफ जो सुबूत जमा किए हैं, उनका भी रिपोर्ट में जिक्र किया गया है।
एफबी और व्हाट्स एप की मानिटरिंग
पुलिस की तत्परता और संभ्रांत लोगों की वजह से असामाजिक तत्व अभी तक अपने नापाक मकसद में कामयाब नहीं हो सके हैं। एसएसपी ने बताया कि लोकल इंटेलीजेंस के इनपुट के बाद पुलिस पूरी तरह से अलर्ट है।
पुलिस एफबी और व्हाट्स एप की मानिटरिंग कर रही है कि कहीं कोई भड़काऊ वीडियो या मैसेज भेजकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश न कर सके। अफवाहें न फैला सके।
सांप्रदायिक विवादों की बनेगी कुंडली
दो समुदायों के बीच चल रहे विवाद अब सांप्रदायिक रजिस्टर में दर्ज किए जाएंगे। रेंज के छह जिलों में यह व्यवस्था शुरू करने की तैयारी है। इसकी शुरुआत मेरठ से होगी। इसका खाका तय करने के लिए डीआईजी ने मोदीनगर और बागपत से सांप्रदायिक रजिस्टर मंगवाए हैं।
रजिस्टर में त्योहार रजिस्टर की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। नई बात यह होगी कि इसमें संबंधित विवादित स्थल का फोटो, विवाद का संक्षिप्त विवरण, पुलिस और तहसील प्रशासन द्वारा अब तक की गई कार्रवाई का विवरण, संबंधित थानेदार और सर्किल अफसर के कथन के अलावा विवाद के निस्तारण के लिए प्रयासों को भी दर्ज किया जाएगा।
दंगों की आग में झुलसा वेस्ट यूपी
वेस्ट यूपी के दंगों की आग से गाजियाबाद समेत आसपास के जिलों का डेवलपमेंट प्रभावित हो रहा है। दंगों से न केवल कानून व्यवस्था प्रभावित हुई है, बल्कि विकास योजनाओं पर भी ब्रेक लग गये। दंगों के दौरान बस संचालन रोकने और बसों में तोड़फोड़-आगजनी होने से रोडवेज को काफी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
पुलिस के दंगा नियंत्रण में व्यस्त होने केचलते पासपोर्ट और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों के आवेदनों की जांच अधर में लटक गईं। कुल मिलाकर दंगों ने जहां लोगों के तन-मन को घायल किया, वहीं विकास की डगर पर वेस्ट यूपी को पीछे धकेल दिया।
पुलिसवालों के प्रस्तावित स्थानांतरण और विवेचनाएं प्रभावित हो रही हैं। अधिकांश पुलिसकर्मी पहले पड़ोसी जिलों में हुए बवाल की वजह से ड्यूटी पर रहे। इसके बाद पिछले एक माह से गाजियाबाद में इस तरह के हालात बन रहे हैं, जिनमें पुलिसवाले जुटे हुए हैं। इससे उनके ट्रांसफर और विवेचनाएं प्रभावित हो रही हैं।