दिल्ली बॉर्डर को घेरकर किसान आंदोलन कर रहे हैं। इससे जाम की स्थिति बनी रहती है। कई बार एंबुलेंस भी एक से डेढ़ घंटे तक जाम में फंस जाती हैं। ऐसे में मरीजों की जीवन पर खतरा बना रहता है। मरीजों के स्वास्थ्य के दृष्टिगत उन्हें एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम का सहारा देना पड़ता है।
इस सेवा से लैस एंबुलेंस की संख्या खासी कम है। ऐसे में एंबुलेंस सेवा से जुड़े अफसरों ने वरिष्ठ अधिकारियों को परेशानी से अवगत कराया है। उधर, निजी एंबुलेंस चालकों ने भी दिल्ली जाने के लिए दाम दोगुने कर दिए हैं। इसका सीधा असर मरीजों के स्वास्थ्य व उनकी जेब पर पड़ रहा है।
जिले के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव है। आईसीयू व ट्रॉमा सेंटर समेत कई विशेष सुविधा नहीं होने के कारण गंभीर मरीजों को दिल्ली के सफदरजंग, राम मनोहर लोहिया, लोकनायक और जीटीबी आदि अस्पतालों में रेफर किया जाता है।
कोरोना काल में उपचार के लिए दिल्ली रेफर होने वाले मरीजों की संख्या बढ़ी है। जानकारी के मुताबिक, जिला अस्पताल से सफदरजंग पहुंचने में मात्र 20 से 25 मिनट का समय लगता है, लेकिन कृषि कानून को लेकर चल रहे किसान आंदोलन के कारण मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पा रहे हैं।
आंदोलन का प्रभाव चिल्ला और डीएनडी बॉर्डर पर भी है। ऐसे में प्रबंधन ने मरीजों को 108 एंबुलेंस के बजाय एडवांस लाइफ स्पोर्ट (एएलएस) सिस्टम से लैस एंबुलेंस के जरिए भेजना पड़ रहा है। यह एंबुलेंस आधुनिक सुविधाओं से लैस होती है, लेकिन जिले में इस तरह की मात्र तीन ही एंबुलेंस हैं।
ऐसे में मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। 108 एंबुलेंस के जिला प्रोग्राम मैनेजर संदीप कुमार का कहना है कि जिले से रोज 15 मरीजों को दिल्ली रेफर किया जा रहा है।
आते और जाते समय एंबुलेंस को करीब एक से डेढ़ घंटा जाम में लग जाता है। ऐसे में मरीजों को समय पर मेडिकल सुविधा देने में भी परेशानी हो रही है। सीएमओ डॉ. दीपक ओहरी ने बताया कि समस्या के निदान के प्रयास जारी हैं।