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हार्ट अटैक की रिपोर्ट से नहीं मिटेगा हादसा : हाईकोर्ट

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कहा-चलती ट्रेन की ऊपरी बर्थ से गिरना अवांछित घटना, हार्ट अटैक का हवाला देकर मुआवजा नहीं नकार सकते
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संजीव कुमार की मौत के मामले में रेलवे दावा अधिकरण का आदेश रद्द दो महीने में मुआवजा जारी करने का निर्देश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि चलती ट्रेन में ऊपरी बर्थ से यात्री का दुर्घटनावश गिरना रेलवे अधिनियम, 1989 के तहत अवांछित घटना है। केवल पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हार्ट अटैक (मायोकार्डियल इंफार्क्शन) दर्ज होने के आधार पर दुर्घटना के तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति मनोज कुमार ओहरी ने श्याम सिंह व अन्य की अपील स्वीकार करते हुए रेलवे दावा अधिकरण के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें संजीव कुमार की मौत पर मुआवजे का दावा खारिज किया गया था। अदालत ने मामला मुआवजे की राशि तय करने के लिए अधिकरण को वापस भेज दिया। साथ ही संबंधित अधिकारियों को हाईकोर्ट के आदेश की प्रति मिलने के दो महीने के भीतर मुआवजा जारी करने का निर्देश दिया। मामला 30 सितंबर 2026 को अधिकरण के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है।
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मामला 10 नवंबर 2015 का है। संजीव कुमार अपने पिता श्याम सिंह के साथ ट्रेन नंबर 64157 (इटावा-आगरा कैंट शटल मेमू) में वैध सेकंड क्लास टिकट लेकर इटावा से आगरा कैंट जा रहे थे। आगरा कैंट स्टेशन के पास पहुंचने के दौरान ट्रेन में अचानक झटका लगा और संजीव ऊपरी बर्थ से गिर पड़े। वे बेहोश हो गए और रेलवे डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। आगरा जिला अस्पताल में पोस्टमॉर्टम कराया गया।
अधिकरण ने दावा खारिज करते हुए कहा था कि संजीव वैध यात्री थे, लेकिन उनकी मौत अवांछित घटना के कारण नहीं, बल्कि हार्ट अटैक से हुई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि वैध यात्री होने का तथ्य विवादित नहीं है और मुख्य सवाल यह है कि चलती ट्रेन के अंदर यात्री का गिरना अवांछित घटना की श्रेणी में आता है या नहीं।
ट्रेन के बाहर गिरना जरूरी नहीं
अदालत ने अपने पूर्व फैसले का हवाला देते हुए कहा कि कानून में अवांछित घटना के तहत ट्रेन के अंदर गिरने को भी शामिल किया गया है। इसके लिए यात्री का ट्रेन से बाहर गिरना जरूरी नहीं है। रेलवे के डिप्टी स्टेशन सुपरिंटेंडेंट के मेमो और पंचनामा में संजीव के सीट से गिरने का उल्लेख है, जिसकी पुष्टि उनके पिता के बयान से भी होती है।
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रेलवे दावा अधिकरण का आदेश रद्द
अदालत ने कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मौत का चिकित्सकीय कारण बताती है, लेकिन दुर्घटनावश गिरने के तथ्य को खत्म नहीं करती। संजीव को पहले से हृदय रोग होने का कोई दस्तावेजी या चिकित्सकीय सबूत भी नहीं था। इस आधार पर अधिकरण का आदेश रद्द कर दिया गया।
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