उच्च न्यायालय ने आतंकी फंडिंग मामले में कश्मीरी कारोबारी जहूर अहमद शाह वाटाली की जमानत आवेदन पर सुनवाई स्थगित कर दी। वाटली जहूर ने सुनवाई में देरी व अपने स्वास्थ्य को आधार बनाकर जमानत मांगी है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति जयराम भंभानी की पीठ ने कहा कि वे निचली अदालत द्वारा इस मामले में आरोप तय करने के आदेश पारित करने के बाद अगस्त में मामले की सुनवाई करेंगे।
पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने वाटाली की जमानत रद्द करते हुए पहले ही कहा है कि राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने द्वारा जांच के दौरान एकत्रित साक्ष्य को देखते हुए वाटाली के खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया सही हैं। वाटाली पर लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख हाफिज सईद से नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग के जरिए पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस से मिली रकम को हुर्रियत नेताओं को ट्रांसफर करने का आरोप है।
वाटाली की और से पेश अधिवक्ता शारिक रेयाज ने कहा कि उनके मुवक्किल की आयु व स्वास्थ्य को देखते हुए जमानत प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि वह पिछले चार वर्ष से जेल में है। अदालत ने कहा कि वह इस आधार पर वाटली को रिहा करने का आदेश नहीं दे सकते कि मुकदमे में लंबा समय लगेगा, क्योंकि वाटाली का मामला ऐसा नहीं है कि वह प्रथम दृष्टया दोषी नहीं है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि दिल्ली दंगों के आरोपी आसिफ इकबाल तन्हा को जमानत देने का मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है और वटाली के मामले पर यह लागू नहीं होता। सर्वोच्च न्यायालय ने आतंकी फंडिंग मामले में जम्मू-कश्मीर स्थित प्रभावशाली कारोबारी जहूर अहमद शाह वटाली को नियमित जमानत देने संबंधी हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया था।