मलेरिया, डेंगू, स्वाइन फ्लू की आड़ लेकर निजी अस्पताल लोगों की जिंदगी और जेब से खिलवाड़ नहीं कर सकेंगे। स्वास्थ्य मुख्यालय ने स्थानीय अधिकारियों को निजी अस्पतालों की कार्य प्रक्रिया और इलाज प्रणाली में हस्तक्षेप करने का अधिकार दे दिया है।
इन बीमारियों के दौरान निजी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ने पीड़ित को क्या इलाज दिया है। यह निजी अस्पताल हर हाल में स्वास्थ्य विभाग को बताएगा। यही नहीं पीड़ित की कौन सी जांच किस आधार पर करवाई गई है, यह जानकारी भी निजी अस्पताल विभाग को देगा। इन नोटिफाइबल डिजीज के पीड़ितों के नाम अगर कोई निजी स्वास्थ्य संस्थान सार्वजनिक करता है तो वह भी अपराध की श्रेणी में माना जाएगा। इसके लिए उस पर कार्रवाई होगी।
विभाग मुख्यालय ने सभी नोटिफाइड बीमारियों के लिए विशेष निर्देश जारी किए हैं। जिसके अंतर्गत स्थानीय अधिकारी किसी भी समय शहर के किसी भी निजी अस्पताल में छापेमारी या निरीक्षण कर सकेंगे। इसमें शहर के निजी क्लीनिकों, नर्सिंग होम आदि को शामिल किया गया है।
अभी तक स्वास्थ्य विभाग किसी निजी स्वास्थ्य केंद्र परिसर में बिना संबंधित प्रबंधक के अनुमति के नहीं जा सकते थे। लेकिन अब इन निर्देशों के जारी होने के बाद स्थानीय अधिकारियों को अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी।
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. रमेश ने बताया कि निजी अस्पताल कई बीमारियों को लेकर समाज में भय पैदा कर देते हैं। इससे उनकी कमाई बढ़ती है। ऐसी कोई शिकायत सामने आती है तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी।