- अदालत ने आरोपी अभिषेक को 7 जुलाई को ठहराया था दोषी
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। द्वारका कोर्ट ने वर्ष 2021 में नशा करने से रोकने पर मनोज कुमार की हत्या के दोषी अभिषेक शर्मा को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शिवाली बंसल की अदालत ने सजा सुनाते हुए कहा कि जघन्य अपराधों में दोषियों के प्रति अधिक सहानुभूति न केवल अनुचित है, बल्कि यह न्याय प्रणाली की नींव को कमजोर भी कर सकती है। अदालत ने यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए निर्णय के संदर्भ में की।
उत्तम नगर इलाके में आरोपी अभिषेक शर्मा और उसका एक नाबालिग साथी पीड़ित मनोज कुमार के घर के बाहर नशा कर रहे थे। मनोज ने उन्हें रोका तो झगड़ा हो गया। अगले ही दिन अभिषेक अपने साथी के साथ दोबारा आया और मनोज पर चाकू से हमला कर हत्या कर दी। अदालत ने आरोपी अभिषेक को बीते 7 जुलाई को दोषी ठहराया था। अदालत ने हत्या की धारा में उम्रकैद की सजा और एक हजार का जुर्माना लगाया। साथ ही सबूत मिटाने के आरोप में तीन साल की सजा सुनाई। अदालत ने पाया कि दोषी मुआवजा देने में सक्षम नहीं है। ऐसे में कोर्ट ने मामले को पीड़ित मुआवजा योजना के तहत द्वारका की जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजा है।
गरीबी सजा कम करने का आधार नहीं
अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक ने अदालत को बताया कि दोषी ने जघन्य अपराध किया है। उसे अधिकतम सजा मिलनी चाहिए। वहीं, बचाव पक्ष ने दोषी की गरीबी और पहली बार अपराध करने का हवाला देते हुए नरमी की अपील की, लेकिन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि गरीबी सजा कम करने का आधार नहीं हो सकती।