एक मंत्री किसी पान वाले को भी अपना सचिव नियुक्त कर
सकता है, हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी सोमवार को एक याचिका के मद्देनजर की।
हाईकोर्ट ने कहा कि एनडीए के मंत्रियों द्वारा सचिवों की नियुक्ति के संबंध
में केंद्र सरकार के सर्कुलर को चुनौती देने वाली याचिका को जनहित याचिका
के तौर पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
जस्टिस
बीडी अहमद व जस्टिस एस मृदुल की खंडपीठ ने एनजीओ वॉयस ऑफ ह्यूमन राइट्स
एंड जस्टिस द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के लिए 18 नवंबर की तारीख तय की
है। खंडपीठ ने कहा कि मंत्री किसी पान वाले को भी सचिव नियुक्त कर सकता है।
यह कोई ऐसा पद नहीं है जिसके लिए इश्तिहार निकाला जाए। इस संबंध में अगर
मंत्री चाहे तो कोई सचिव न रखे। इस मामले में जनता को किसी तरह का नुकसान
नहीं है। यह सेवा से संबंधित मामला है।