हाई कोर्ट ने आदर्श नगर मेट्रो स्टेशन से 21 वर्षीय मूक-बधिर युवती के लापता होने के मामले में दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन व सीआईएसएफ को आड़े हाथों लिया। अदालत ने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर युवती बिना टोकन सिक्योरिटी गेट से बाहर कैसे गई। यह गंभीर लापरवाही का मामला है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी व न्यायमूर्ति दीपा शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि युवती को जरूर रोका गया होगा, अगर ऐसा नहीं किया गया तो यह सुरक्षा में बड़ी चूक है। बिना टोकन के उसे बाहर निकलने में मशक्कत करनी पड़ी होगी।
अदालत ने उक्त दोनों एजेंसियों से कहा कि क्या वह इतने सतर्क हैं कि इस तरह की घटना को रोका जा सके। अगर नहीं तो उन्हें सतर्क होना चाहिए।
खंडपीठ ने समाचार पत्रों में प्रकाशित युवती के लापता होने संबंधी खबरों पर स्वत: संज्ञान लिया है। गत 21 अप्रैल को युवती की मां व बहन तो जहांगीर पूरी मेट्रो स्टेशन पर उतर गई थीं लेकिन भीड़ अधिक होने के चलते वह नहीं उतर सकी और दरवाजा बंद हो गया। आखिरी बार उसे आदर्श नगर मेट्रो स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज में स्टेशन से बाहर जाते देखा गया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आदर्श नगर मेट्रो स्टेशन के आसपास कई झुग्गियां हैं। दिल्ली पुलिस जांच करें की कहीं युवती का किसी ने अपहरण तो नहीं कर लिया। दिल्ली पुलिस की तरफ से अधिवक्ता राहुल मेहरा ने माना कि युवती के अपहरण होने की आशंका है।
उन्होंने बताया कि पुलिस रेड लाइट एरिया व घटनास्थल से सटे क्षेत्रों में छापेमारी कर रही है। इतना ही नहीं युवती की तलाश के लिए स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम बनाई गई है। सोशल मीडिया की भी मदद ली जा रही है।
उन्होंने कहा तिपहिया पूरी दिल्ली में चलते हैं। इनके पीछे भी युवती की पोस्टर लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा आसपास के राज्यों से भी मदद ली जा रही है। अदालत ने मामले की सुनवाई 11 मई तय करते हुए पुलिस को विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।