-हाईकोर्ट ने कहा- प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया गया बयान कोई कानूनी वादा नहीं होता
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा किराए को लेकर दिया गया बयान कानूनी रूप से लागू नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति सी हरि शंकर और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने 2021 के आदेश को रद्द कर दिया। पहले के आदेश में कहा गया था कि सरकार को केजरीवाल के बयान के आधार पर किराएदारों के लिए नीति बनानी चाहिए। लेकिन, अब हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया गया बयान कोई कानूनी वादा नहीं होता।
पीठ ने कहा कि सरकार को ऐसे बयान को लागू करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और इस मामले में रिट ऑफ मैंडमस भी जारी नहीं की जा सकती। हालांकि, कोर्ट ने किराएदारों को आंशिक राहत दी है। अदालत ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान जो प्रवासी किराएदार अपने घर नहीं लौट पाए, उनसे उस अवधि का किराया नहीं मांगा जा सकता। लेकिन, यह राहत सिर्फ लॉकडाउन के समय तक ही सीमित रहेगी। पीठ ने यह भी कहा कि सरकार चाहे तो किराएदारों की मदद के लिए कोई नीति बना सकती है, लेकिन अदालत उसे ऐसा करने का आदेश नहीं दे सकती। यह मामला उन दिहाड़ी मजदूरों की याचिका से जुड़ा था।