दिल्ली सरकार द्वारा सर गंगाराम अस्पताल के खिलाफ दायर एफआईआर को खारिज करने की मांग वाली याचिका पर उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। सर गंगाराम अस्पताल की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायालय ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। मामले पर अगली सुनवाई के लिए 11 अगस्त की तारीख निर्धारित की गई है।
मालूम हो कि दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों की गिनती में शामिल सर गंगा राम अस्पताल के खिलाफ पिछले दिनों दिल्ली सरकार ने कोविड-19 रेगुलेशन का उल्लंघन करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अस्पताल के खिलाफ महामारी अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
इस दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने वीडियो कॉन्फ्रेंस कर दिल्ली के कई अस्पतालों पर विपक्षी दलों के साथ मिलकर बदमाशी करने का भी आरोप लगाया था। इसके बाद दिल्ली सरकार ने सर गंगाराम अस्पताल पर एफआईआर दर्ज करा दी थी।
आईपीसी की धारा 154 के तहत एफआईआर दर्ज कराई गई थी। आरोप लगाया गया था कि अस्पताल अपनी क्षमता के मुताबिक लोगों को सुविधाएं नहीं दे रहा है। उसपर भर्ती न करने और बेडों की कालाबाजारी का आरोप लगाया गया था।
एफआईआर में कहा गया था कि अस्पताल कोरोना संदिग्धों की जांच में आरटी-पीसीआर एप का इस्तेमाल नहीं कर रहा है। जो साफ तौर पर महामारी अधिनियम का उल्लंघन है। तीन जून को दिल्ली सरकार ने सर गंगा राम अस्पताल प्रशासन को एक पत्र भेजा था, जिसमें कहा गया था कि अस्पताल कोरोना संदिग्धों की जांच के लिए आरटी-पीसीआर एप का इस्तेमाल नहीं कर रहा है, जो महामारी अधिनियम का उल्लंघन है। इसलिए अब अस्पताल में कोरोना जांच नहीं की जाएगी।
हालांकि बीते 13 जून को शाम में दिल्ली सरकार ने गंगा राम अस्पताल को फिर से कोरोना जांच करने की अनुमति दे दी थी। लेकिन उसी दिन सुबह अस्पताल प्रबंधन ने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपने खिलाफ दायर एफआईआर को खारिज करने को लेकर एक याचिका दायर की थी, जिसकी सुनवाई करते हुए आज अदालत ने केजरीवाल सरकार को नोटिस जारी किया है।