शिक्षण, स्वास्थ्य एवं सामाजिक कार्यों में लगी संस्थाओं से फ्लोर एरिया रेशो (एफएआर) शुल्क वसूली मामले में कोर्ट ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को जबरदस्त झटका दिया है।
हाईकोर्ट ने तीन शिक्षण संस्थानों के भवनों में अतिरिक्त निर्माण के एवज में वसूली गई एफएआर शुल्क की राशि आठ सप्ताह में वापस करने का आदेश दिया है।
इस अदालती आदेश के चलते डीडीए को अब 1377 सामाजिक संस्थाओं को करीब तीन हजार करोड़ रुपये लौटाने पड़ सकते हैं।
इनके याचिका पर जारी हुआ निर्देश
हाल ही मुख्य न्यायाधीश का पद संभालने वाली जी रोहिणी व न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग की खंडपीठ ने वेद एजुकेशनल वेलफेयर सोसायटी, त्रिवेणी एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर सोसायटी और इंटरनेशनल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट की संयुक्त याचिका पर यह आदेश दिया है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि उन्हें आयकर से छूट प्राप्त है। इस कारण उनके भवनों में अतिरिक्त निर्माण के शुल्क उनसे नहीं वसूले जाने चाहिए।
डीडीए की ओर से 2008 में गठित समिति की 2012 में आई रिपोर्ट में भी बताया गया कि शिक्षण, स्वास्थ्य और सामाजिक कार्य करने वाली संस्थाओं को एफएआर में छूट मिली हुई है। बावजूद इसके डीडीए ने केंद्र सरकार की सिफारिशों के आधार पर एफएआर शुल्क की वसूली की।
इन्हें मिलेगा फायदा
पैसे जमा होने के बाद में केंद्र सरकार ने भी इससे संबंधित अधिसूचना जारी कर दी थी।
इस अधिसूचना को चुनौती देती याचिका पर हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने डीडीए को एफएआर की राशि वापस करने का निर्देश दिया था जिसे डीडीए ने चुनौती दी थी।
इनमें वेद एजुकेशनल वेलफेयर सोसायटी 1.46 करोड़, त्रिवेणी एजुकेशनल एंड सोशल वेलफेयर सोसायटी 44 लाख और इंटरनेशनल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट के 2.87 करोड़ रुपये डीडीए के पास जमा हैं।