हरियाणा सरकार ने बृहस्पतिवार को दिल्ली हाईकोर्ट में लिखित दिया कि जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों को राज्य की सीमाओं पर नहीं रोका जाएगा। इनमें निजी डॉक्टर, नर्स, पुलिस, अदालत तथा स्थानीय निकायों से जुड़े अधिकारी तथा कर्मचारी शामिल हैं। लेकिन इन सभी को सीमा पर ई-पास दिखाना होगा। हरियाणा सरकार ने हाईकोर्ट को यकीन दिलाया कि जरूरी तथा गैर जरूरी सामान लेकर दिल्ली तथा हरियाणा के शहरों के बीच जाने वाले ट्रकों को भी बॉर्डर पर नहीं रोका जाएगा।
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जस्टिस मनमोहन तथा संजीव नरूला की बेंच ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से हुई सुनवाई के दौरान कहा कि हरियाणा सरकार के लिखित बयान के बाद याची अब जनहित याचिका को जारी नहीं रखना चाहता। कोर्ट इस मामले का निस्तारण करती है। दरअसल अदालत याची ओपी गुप्ता द्वारा दायर जनहित याचिका पर वकील नितिन गर्ग के जरिए सुनवाई कर रही थी।
याची का कहना था कि केंद्र सरकार को हरियाणा सरकार के बॉर्डर पर जरूरी सेवाओं से जुड़े लोगों को रोकने की नीति पर कार्रवाई करनी चाहिए। राज्य सरकार अपनी सीमाओं से जरूरी सेवाओं से जुड़े डॉक्टरों, नर्स, पैरामैडिक स्टाफ, सफाई कर्मी, दिल्ली पुलिस और डीटीसी के कर्मचारियों को नहीं जाने दे रही है। यहां तक कि ट्रकों को भी नहीं गुजरने दे रही।
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हाईकोर्ट में हरियाणा सरकार के एडिशनल एडवोकेट जनरल अनिल ग्रोवर ने लिखित दिया कि कंटेनमेंट जोन के अलावा सभी तरह सामान वाले ट्रकों को जाने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बॉर्डर खुला रखा जाएगा और इसे खोदकर या किसी अन्य तरीके से बंद नहीं किया जाएगा। बॉर्डर पर पुलिस तैनात रहेगी। हरियाणा सरकार का कहना है कि जरूरी सेवाओं से जुड़े सभी लोगों को ई-पास जारी किए जाने चाहिए। आवेदन के 30 मिनट में पास जारी कर दिया जाएगा। यह पूरी लॉकडाउन अवधि के लिए होगा।