पांच साल तक चलने वाले इस प्रोजेक्ट की वजह से रोजगार भी सृजित होगा। रेलवे का अनुमान है कि इससे करीब 76.30 लाख मानव दिवस रोजगार मिलेगा। प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद इस रूट पर पड़ने वाले कई शहरों और गांवों का भी विकास होगा। पूरा ट्रैक हरियाणा के कई ऐसे ग्रामीण शहरों तक पहुंचेगा, जहां यातायात का अब तक संकट है।
दिल्ली को कैसे बाईपास करेगी ट्रेन
अंबाला रेल मंडल के हरसाना कलां से अगर कोई ट्रेन या मालगाड़ी चलती है तो उसे दिल्ली आकर मथुरा जाने की जरूरत नहीं होगी। दिल्ली को बाईपास करते हुए हरसाना कलां से इस ट्रैक से चलने वाली ट्रेन सीधे पलवल के रास्ते मथुरा पहुंच जाएगी।
कहां बनेंगे टर्मिनस
इस पूरे रेल ट्रैक पर कुल 14 स्टेशन होंगे। इनमें तीन बड़े टर्मिनस गुरुग्राम, मानेसर, बिजवासन मुख्य होंगे। लिहाजा गुरुग्राम से चंडीगढ़, अमृतसर जाना भी आसान हो जाएगा।
इंटरचेंज स्टेशन
दिल्ली-मथुरा रेल लाइन पर असावटी इंटरचेंज होगा। इसी तरह दिल्ली-रेवाड़ी लाइन पर पाटली, दिल्ली-रोहतक लाइन पर असौदा, दिल्ली-अंबाला लाइन पर हरसाना कलां और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर पृथला मुख्य इंटरचेंज स्टेशन होगा।
ये होंगे मुख्य स्टेशन
तारकपुर, असौदा, मनधौती, बादली, सुल्तानपुर, पातील, मानेसर, डूंगरवास, सोहना, नूंह, झज्जर। हालांकि कैबिनेट की स्वीकृति के बाद अब कुछ बदलाव भी किया जा सकता है।