साइबर सिटी की आईटी कंपनियां प्रदेश सरकार के दबाव से बेचैनी महसूस कर रही हैं। सरकार ने आईटी सेक्टर में हरियाणा के युवाओं की नौकरी में भागीदारी बढ़ाने को कवायद शुरू कर दी है।
अभी आईटी कंपनियों के रोजगार में स्थानीय हिस्सेदारी महज 30 प्रतिशत है। गुड़गांव की आईटी कंपनियों का कहना है कि हरियाणा में दक्ष कर्मियाें की भारी कमी है। इस कारण उन्हें दूसरे प्रदेशों की प्रतिभाओं को आमंत्रित करना पड़ता है।
आईटी विशेषज्ञों का मत है कि सरकार वाकई स्थानीय युवाओं के लिए चिंतित है तो उसे इसके लिए ठोस इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना चाहिए।
ताकि इसकी मदद से इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक और आईटीआई में आईटी सेक्टर के लिए दक्ष वर्कफोर्स तैयार की जा सके।
प्राइम कॉल इंटरनेशनल की एचआर डायेक्टर विनीता यादव ने बताया कि बिना योग्यता के आईटी-आईटीईएस सेक्टर में जॉब नहीं है। सिर्फ दबाव बनाना काफी नहीं। इसके लिए उपयुक्त को माहौल तैयार करना चाहिए।
गुड़गांव में तकरीबन 500 आईटी-आईटीईएस (इंफार्मेशन टेक्नॉलजी-आईटी इनेबल्ड्स) कंपनियां हैं। इनमें तकरीबन तीन लाख लोग कार्यरत हैं।
प्रतिभा की कमी से आईटी कंपनियों को काफी नुकसान हो रहा है। इस कारण कंपनियों को दूसरे प्रदेशों से प्रतिभाशालिओं को लाना पड़ रहा है। इसमें उनका खर्चा 20 प्रतिशत और बढ़ जाता है। -राकेश कपूर, को-चेयरमैन नैस्कॉम हरियाणा।
आईटी कंपनियों के सर्वोत्तम इंजीनियरों में से काफी हरियाणा के हैं। मगर यहां के तकनीकी संस्थानाें से पढ़कर निकलने वाले इंजीनियर काफी कमजोर हैं। जो आईटी कंपनियों के काम लायक नहीं होते।
हरियाणा के कॉलेजों का स्तर ऐसा बने कि आईटी कंपनियां अपने सारे इंजीनियर यहीं भर्ती करें। मगर इसके लिए सरकार को कुछ ठोस करना होगा। -डॉ.मानस फुलेरिया, को-फाउंडर एंड सीईओ नगारो सॉफ्टवेयर