82 करोड़ रुपये ईडीसी बकाया है। इस हिसाब से प्रोजेक्ट लागत 582 करोड़ रुपये आएगी। खंडेलवाल ने बताया कि आवंटियों से बकाया राशि के तौर पर 120 करोड़ रुपये मिल सकते हैं तथा प्रोजेक्ट के बचे हुए फ्लैटों व जमीन से लगभग 250 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान अलॉटी एसोसिएशन द्वारा लगाया गया है।
उन्होंने बताया कि हरेरा द्वारा आवंटियों की समस्या को देखते हुए ओरिस इंफ्रास्ट्रक्चर तथा थ्री सी शैल्टर इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटिड के सभी बैंक खाते सीज कर दिए गए हैं। अब हरेरा अपनी देखरेख में इस प्रोजेक्ट को पूरा करवाएगा। यदि कोई आवंटी प्रोजेक्ट से निकलना चाहेगा और अपना जमा करवाया हुआ पैसा वापस मांगेगा तो उसे ब्याज सहित पैसा दिलवाया जाएगा।
अनियमितताओं की होगी जांच
हरेरा ने प्रोफेसर एमएस तुरान को इस प्रोजेक्ट का जांच आयुक्त नियुक्त किया है, जो 10 दिन में रिपोर्ट देंगे। वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए कैरीज एंड ब्राउन नामक ड्यू डिलिजेंश फाइनेंशियल फर्म को जिम्मेदारी दी गई है और कितने फ्लैट बेचे गए व कितने बचे हुए हैं, इसका सर्वेक्षण करने की जिम्मेदारी क्वांटम इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लि. को दी गई है, जो दो महीने में अपनी रिपोर्ट देगी।
प्रोजेक्ट पर एक नजर
-ओरिस इंफ्रास्ट्रक्चर को 47 एकड़ का लाइसेंस मिला था
-37 एकड़ पर यह हाउसिंग प्रोजेक्ट बनाया जा रहा था।
-थ्री सी शेल्टर इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लि. के पास निर्माण की जिम्मेदारी है।
-फ्लैटों में से 35 प्रतिशत फ्लैट ओरिस तथा 65 प्रतिशत फ्लैट थ्री सी शेल्टर इंफ्रास्ट्रक्चर के पास बेचने का अधिकार।