निठारी में 17 जर्जर भवन स्वामियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। हरौला, नया बांस व झुंडपुरा में दो-दो जर्जर भवनों पर असुरक्षित का नोटिस चस्पा किया गया है। असुरक्षित व जर्जर भवनों के परीक्षण के लिए नियोजन, संबंधित वरिष्ठ प्रबंधक, एक स्ट्रक्चरल इंजीनियर व राइट्स लिमिटेड के नामित अधिकारियों की एक समिति बनाई गई है और वह इसकी जांच करेंगे। जांच के बाद पता चलेगा कि इनमें से कितने भवन भविष्य में रहने लायक हैं या नहीं। अगर इंजीनियरों की टीम इसे रहने लायक बनाने के लिए सुझाव देती है तो ठीक है। अन्यथा इसे भी तोड़ने की कार्रवाई होगी।
50 इमारतें सील, 60 को नोटिस
अधिकारियों का कहना है कि 114 इमारतों में से 50 को सील कर दिया गया है। रायपुर गांव के 4 भवन मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए भवन खाली कराए गए। 60 अन्य भवन मालिकों को नोटिस दिया गया है। अधिसूचित एवं अर्जित भूमि पर सभी अवैध निर्माण हटाए जाएंगे।
इन सभी जमीनों का अधिग्रहण करने के बाद जिला प्रशासन के पास मुआवजा जमा करा दिया गया है। हालांकि, कितने किसानों ने जमीनों का मुआवजा उठाया है। यह स्पष्ट नहीं हो सका है। बावजूद इसके अधिकारियों का कहना है कि जब जमीन अधिगृहीत कर ली गई तो फिर यहां निर्माण नहीं किया जा सकता। मुआवजा उठाने या न उठाने का मामला बातचीत के बाद ही तय हो सकता है।
अनार्जित जमीन पर बनी 261 अवैध इमारतों का ध्वस्तीकरण भी संभव
प्राधिकरण के मुताबिक, अधिकांश अधिसूचित जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया है, लेकिन करीब 2500 एकड़ जमीन बच गई थी, जिसका शहरीकरण करना था। प्राधिकरण को भविष्य में इसका अधिग्रहण करने की कवायद करनी थी, लेकिन यह काम अभी तक नहीं हो पाया।
इसी बीच ऐसी अनार्जित जमीन पर तीन मंजिल से अधिक की 261 अवैध इमारतों का निर्माण कर लिया गया। प्राधिकरण का साफ कहना है कि यह सभी इमारतें अवैध की श्रेणी में आती हैं और इनके खिलाफ नियम के मुताबिक कार्रवाई होगी। फिलहाल प्राधिकरण ने इसके ध्वस्तीकरण को लेकर पत्ते नहीं खोले हैं। संभावना है कि इनकों भी गिराने की सूची में डाला जाए।
आबादी की 1326 इमारतों पर फैसला होना बाकी
प्राधिकरण के सर्वे में गांवों की आबादी में तीन मंजिल से अधिक की बनी 1326 इमारतों को चिह्नित किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इन इमारतों के खसरे का सत्यापन भूलेख विभाग कर रहा है। सत्यापन के बाद पता चल पाएगा कि अमुक निर्माण प्राधिकरण की अधिसूचित क्षेत्र में है या नहीं।
इसके बाद यह पता चलेगा कि यह निर्माण गांव की आबादी में किया गया है या यह आबादी से बाहर का निर्माण कार्य है। हालांकि, प्राधिकरण का साफ कहना है कि गांवों की मूल आबादी में बनी इमारतों के संबंध में अभी नीतिगत निर्णय होना बाकी है। इसके बाद ही इस आंकड़ों पर कुछ भी कहा जा सकता है।